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दिल्ली में क्यों हुई जिम मालिक नादिर शाह की हत्या? लारेंस या हाशिम बाबा...साजिश किसकी, उलझी हुई है गुत्थी

Delhi Gym Owner Murder News: टाइम्स नाउ को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जिम मालिक नादिर शाह के बिजनेस पार्टनर से लारेंस गैंग ने 5 करोड़ की रंगदारी मांगी थी। हालांकि, नादिर ने पैसे देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद से ही वह लारेंस गैंग के निशाने पर आ गया।

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जिम मालिक की हत्या

Delhi Gym Owner Murder News: दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में गुरुवार को एक जिम मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दो मोटरसाइकिल सवारों ने उनपर यह हमला किया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को शक है कि इन चारों ने हमलावरों को हथियार व अन्य सामान्य उपलब्ध कराया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नितलेश तिवारी, विशाल वर्मा और आकाश यादव और नवीन बालियान के रूप में हुई है। हालांकि, यह गुत्थी अभी भी बनी हुई है कि जिम मालिक की हत्या क्यों की गई?

टाइम्स नाउ को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जिम मालिक नादिर शाह, कुणाल छाबड़ा का बिजनेश पार्टनर भी था। आरोप है कि कुणाल दिल्ली के अंदर कई अवैध कॉल सेंटर चलाने में शामिल रहा है। वह अभी दुबई में है और उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट निकला हुआ है। सामने आया है कि कुणाल से लारेंस गैंग ने 5 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन नादिर शाह ने कुणाल को यह पैसे देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद से ही नादिर लारेंस गैंग के निशाने पर आ गया था।

इस एंगल से भी जांच कर रही पुलिस

नादिर शाह की हत्या का दूसरा कारण यह सामने आया है कि उसकी दक्षिणी दिल्ली के गैंगस्टर रवि गंगवाल और रोहित चौधरी से दोस्ती थी। इन दोनों से उत्तर पूर्वी दिल्ली के गैंगस्टर हाशिम बाबा की दुश्मनी थी। इसलिए हत्याकांड में लारेंस ने रोहित गोदारा के जरिए हाशिम बाबा का इस्तेमाल किया। लारेंस ने इसमें गैंगस्टर रणदीप को भी शामिल किया, जो इस वक्त अमेरिका में है। रणदीप मूलरूप से आजमगढ़ का रहने वाला है और उसी ने उसने हत्या के लिए आजमगढ़ से शूटर भेजे थे। उधर तिहाड़ जेल में हाशिम बाबा ने साजिश में समीर बाबा को भी शामिल किया। समीर इस वक्त तिहाड़ जेल में बंद है और एक बार उसे नादिर शाह ने धमकाया था और फिर हाशिम बाबा और आजमगढ़ के रणदीप के शूटरों ने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

रिपोर्ट - अनुज मिश्रा

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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