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राजा मर्डर केस: प्रेमी या हत्यारा ! कौन है संजय वर्मा जिसको सोनम ने किए थे 200 से ज्यादा फोन कॉल

राजा मर्डर केस में एक नई गुत्थीसुलझी है । अब पुलिस की जांच में यह पता चला है कि जिस शख्स को आरोपी सोनम ने 200 से ज्यादा बार कॉल किया था वो कोई और नहीं बल्कि उसका प्रेमी राज कुशवाह का छद्म नाम था जिसकी पुष्टि की गई है।

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प्रेमी या हत्यारा ! किसको फोन करती रही सोनम

नई दिल्ली: मेघालय में हनीमून के दौरान पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप गिरफ्तार सोनम रघुवंशी ने अपनी शादी से पहले संजय वर्मा नामक एक व्यक्ति को 200 से ज्यादा बार फोन कॉल किए थे। बाद में पुलिस जांच में पता चला कि यह उसके प्रेमी राज कुशवाह का छद्म नाम था। एक पुलिस अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पिछले महीने प्रदेश के पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा में इंदौर के व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में उसकी पत्नी सोनम समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

सोनम ने शादी के बाद भी किए थे कई कॉल

पूर्वी खासी हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक विवेक सिम ने बताया कि हमें पता चला है कि सोनम ने राजा से शादी से पहले संजय वर्मा नामक व्यक्ति को 100 से अधिक फोन कॉल किए थे। शादी के बाद भी कॉल जारी रहीं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने वर्मा का पता लगाने के लिए इंदौर में तलाशी अभियान चलाया, जिसका फोन बंद था।

सिम राज कुशवाह का

सिम ने कहा कि बाद में पता चला कि वर्मा कोई और नहीं बल्कि कुशवाह है, जिसने अपनी प्रेमिका के पति की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि हमारी टीम इंदौर में है और कुछ लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि पता लगाया जा सके कि राजा की मौत से किसी को फायदा तो नहीं हो सकता था।

23 मई को हुई थी राजा रघुवंशी की हत्या

विशेष जांच दल की एक टीम मध्यप्रदेश के इंदौर में है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 23 मई को हुई राजा रघुवंशी की हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग के अलावा कोई वित्तीय मकसद तो नहीं है।पुलिस अधीक्षक ने कहा कि हत्यारों ने तीन असफल प्रयासों के बाद राजा रघुवंशी की हत्या करने में कामयाबी हासिल की। उन्होंने कहा कि इससे पहले राजा की हत्या का प्रयास गुवाहाटी, नोंग्रियाट और वेइसाडोंग फॉल्स के पास किए गए थे।

हत्याकांड के आरोपी हुए है गिरफ्तार

मेघालय में हनीमून मनाने गए राजा रघुवंशी की 23 मई को साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह (20) और कुशवाह के तीन दोस्तों- विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को गिरफ्तार किया गया है।

2 जून को मिला था राजा रघुवंशी का शव

रघुवंशी, मेघालय में हनीमून के दौरान 23 मई को लापता हो गए थे और उनका क्षत-विक्षत शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में दो जून को मिला था।सोनम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पुलिस के सामने आठ जून को देर रात आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि कुशवाह समेत चार आरोपियों को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था।

गौर हो कि राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के लिए मेघालय रवाना हुए थे। मेघालय पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की विस्तार से तहकीकात कर रहा है। (भाषा इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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