डॉक्टर...ये डॉक्टर हमारे लिए इंसान, भगवान होते हैं। वे रात-दिन और आपात स्थिति में भी काम करते हैं। जान बचाते हैं और मानवता की मिसाल देते हैं, पर इन्हीं से कुछ निजी हित के लिए हैवान बन जाते हैं और पूरी बिरादरी के लिए बदनामी का कारण बनते हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर ने धड़कनों का सौदा किया और उन लोगों तक को पेसमेकर लगा दिए, जिन्हें न तो कोई बीमारी थी और न ही उसकी जरूरत थी। आइए, जानते हैं पूरे केस के बारे में:
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के सैफई का है। वहां के यूपी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोपी डॉक्टर समीर सर्राफ ने अपनी अय्याशियां पूरी करने के लिए लोगों की जान से बड़े स्तर पर खिलवाड़ किया। उसने डुब्लीकेट और सस्ते पेसमेकर लगाकर लगभग 600 लोगों की जान के साथ खेल किया। हैरत की बात है कि सांसों के इस सौदागर ने पेसमेकर उन लोगों को भी लगा दिया, जिन्हें उसकी जरूरत नहीं थी और न ही कोई बीमारी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2018 में आरोपी डॉक्टर ने पेसमेकर प्लांट कराने गए लोगों से दोगुने पैसे ऐंठे। आगे साल 2019 में कमजोरी के चलते पहुंची रेशमा नाम की महिला को सही करने का प्रलोभन देकर पर्मांनेट पेसमेकर लगाने का दावा किया। इस डिवाइस के लिए महिला से एक लाख 85 हजार रुपए लिए गए और कानपुर के कृष्णा हेल्थकेयर की हाथ से लिखित एक रसीद थमा दी गई थी। पर दो महीने के भीतर ही वह पेसमेकर खराब हो गया।
मामले को लेकर एक मीडिया संस्थान से मृतका के पति मो.ताहिर अंसारी ने बात की और बताया- पत्नी की मौत के बाद हमारा परिवार बिखर गया है। डॉक्टर समीर भ्रष्टाचारी है। गलत पेसमेकर लगाकर उसने जानकर लोगों की हत्याएं कर दीं, जिसमें मेरी पत्नी भी थी। हम लोग पूरा मामला समझ नहीं पाए थे। कानून को इसमें सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उसने उन लोगों को भी पेसमेकर लगाए, जिन्हें उनकी जरूरत नहीं थी।
दरअसल, पेसमेकर एक छोटी सी डिवाइस होती है। यह छाती के बाईं ओर इंप्लांट (फिट) की जाती है, जो कि अनियंत्रित ह्रदय गति को नियमित करने का काम करती है। पेसमेकर में तीन हिस्से होते हैं, जिनमें बैट्री, कंप्यूटराइज जेनेरेटर और वायर होते हैं। पेसमेकर की जरूरत उन्हें पड़ती है, जिन्हें बार-बार चक्कर आते हैं या फिर जो बार-बार बेहोश हो जाते हैं। हर्ट अटैक का सामना कर चुके लोगों को भी कई बार इसकी जरूरत पड़ती है।
