क्राइम

दर्दनाक: गला पकड़ा ,मुक्का मारा, पीटकर अपनी मां को बेटे ने मार डाला

गुलाबी नगरी जयपुर में एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। एक बेटे पर अपनी मां की हत्या का आरोप है । पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

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बेटा अपनी मां की हत्या के आरोप मे ंगिरफ्तार (PHOTO -canva)

गुलाबी नगरी जयपुर में एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। एक बेटे पर अपनी मां की हत्या का आरोप है । मां की हत्या के आरोप में नवीन सिंह को महेंद्रगढ़ , हरियाणा से अरेस्ट किया गया है। सोमवार सुबह नवीन सिंह के वाई-फाई कनेक्शन काटने को लेकर अपनी मां संतोष से कहासुनी हो गई थी। झगड़ा बढ़ने पर गुस्से में नवीन अपने कमरे से बाहर निकला।

उसने अपनी मां संतोष का गला पकड़कर दबाया, मुंह पर मुक्का मारा और फिर कमरे में रखा डंडा उठाकर मां के सिर पर भी मारा। हमले में मां बुरी तरह से घायल हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

मां को पीटते हुए वीडियो सामने आया

पुलिस ने 31 वर्षीय नवीन सिंह को उस समय गिरफ्तार किया जब एक वीडियो में उसे अपने घर के रसोईघर में अपनी मां को बेरहमी से पीटते हुए वीडियो में दिखाया गया। नवीन सिंह के पिता लक्ष्मण सिंह दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल हैं और पहले सेना में थे। उन्होने अपनी पत्नी को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन नवीन ने उनकी एक ना सुनी। केवल पिता ही नहीं नवीन सिंह की बहन ने भी भाई को अपनी मां को पीटने से रोकने की कोशिश की। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार डीसीपी (पश्चिम) हनुमान प्रसाद ने बताया कि सिंह को हत्या के दिन हिरासत में लिया गया था और बाद में मंगलवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।

मां संतोष की मौत का कारण क्या था?

बताया जा रहा है कि नवीन सिंह अक्सर अपनी मां के साथ लड़ाई करते थे। सोमवार को संतोष ने घर में इंटरनेट कनेक्शन काट दिया और जब रसोई में LPG सिलेंडर खत्म हो गया तो नवीन सिंह को डांटा। गुस्से में नवीन ने अपनी मां को गले से पकड़ा और उसके चेहरे पर घूंसा मारा। फिर वह अपने कमरे में गया और एक डंडा लाकर अपनी मां के सिर पर मारा।

पिता और बहनों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन लड़ाई में घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने जब शोर सुना तो उन्होंने पुलिस को बुलाया। अधिकारी तुरंत पहुंचे और उसे हिरासत में ले लिया। संतोष को बाद में अस्पताल ले जाया गया क्योंकि उसके कान से खून बह रहा था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गौर हो कि वर्ष 2020 में घरेलू विवादों के कारण अपनी पत्नी से भी तलाक ले लिया था।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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