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बीजेपी के एक साल पूरा होने पर दिल्ली में लगे “याद आ रहे केजरीवाल” के पोस्टर, सौरभ भारद्वाज ने कहा ये

दिल्ली की राजनीति में बीते एक साल में आए बदलाव अब जनता के रोजमर्रा के अनुभवों में भी झलकने लगे हैं। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का दावा है कि मौजूदा हालात के कारण लोगों को फिर से अरविंद केजरीवाल का दौर याद आने लगा है। ट्रैफिक जाम, मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर उठते सवालों ने राजधानी में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सौरभ भारद्वाज (फोटो: Twitter - @AAPDelhi)

Photo : Twitter

Delhi News: दिल्ली की राजनीति में बीते एक साल के दौरान हालात किस कदर बदल गए हैं, इसका असर अब शहर की सड़कों पर भी साफ नजर आने लगा है। हाल ही में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि महज एक साल में ही लोगों को अरविंद केजरीवाल की याद आने लगी है। सौरभ भारद्वाज ने व्यंग्य करते हुए बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करीब एक घंटे की देरी से शुरू हुई। इसके लिए उन्होंने दिल्ली और केंद्र सरकार को “धन्यवाद” कहा, क्योंकि पिछले तीन दिनों से मध्य दिल्ली में भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। हालात इतने खराब हैं कि टैक्सी चालक उस क्षेत्र में जाने से भी बच रहे हैं।

आप सरकार के समय बदलाव

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि, ये वही दिल्ली है जिसने 2025 से पहले आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे थे। मोहल्ला क्लीनिक जरूरतमंद और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए एक मजबूत सहारा बने हुए थे। सरकारी स्कूलों के नतीजों और उनके बेहतर बुनियादी ढांचे की चर्चा देश ही नहीं, विदेशों तक होती थी। बिजली के बिलों में राहत मिली, पानी की आपूर्ति सुधरी और आम लोगों को महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

याद आ रहे केजरीवाल के होर्डिंग

लेकिन अब एक साल के भीतर हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार के एक साल पूरे होने पर शहर में जो होर्डिंग लगाए गए, उनमें लिखा था “एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल।” इन पोस्टरों में किसी भी नेता की तस्वीर नहीं थी, न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। केवल एक संदेश था, जो सीधे जनता की भावनाओं को छूता दिखा। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सब कुछ सही चल रहा है, तो फिर किसी नाम से परहेज क्यों?

सौरभ भारद्वाज ने किया ये दावा

सौरभ भारद्वाज ने दावा करते हुए कहा कि, आज दिल्ली की गलियों और मोहल्लों में लोग कई सवाल उठा रहे हैं। कहीं मोहल्ला क्लीनिक बंद पड़े हैं या उनकी रफ्तार पहले जैसी नहीं रही, तो कहीं सरकारी अस्पतालों में मरीजों की कतारें पहले से ज्यादा लंबी नजर आ रही हैं। स्कूलों में भी वह उत्साह और सुधार की गति दिखाई नहीं दे रही, जिसकी पहले चर्चा होती थी। प्रदूषण का स्तर घटने के बजाय कई मौकों पर और बढ़ जाता है। कई क्षेत्रों से पानी की अनियमित आपूर्ति और सफाई व्यवस्था में ढिलाई की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। फरवरी 2025 से पहले के दौर में अरविंद केजरीवाल को ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता था, जिन्होंने राजनीति के तौर-तरीकों को अलग दिशा दी। उन्होंने वादों की जगह काम पर जोर देने की बात कही। सरकारी स्कूलों में सुधार हुए, मोहल्ला क्लीनिक शुरू हुए और बिजली-पानी के बिलों में राहत मिली।

रोजमर्रा के अनुभव से फैसला करती है जनता

सौरभ भारद्वाज का कहना है कि, जनता भावनाओं से ज्यादा अपने रोजमर्रा के अनुभव से फैसला करती है। अगर सुबह घर में पानी न पहुंचे, बच्चों को सरकारी स्कूलों में पहले जैसा वातावरण न मिले, मोहल्ला क्लीनिक में डॉक्टर उपलब्ध न हो, या सड़कों पर घंटों ट्रैफिक जाम झेलना पड़े, तो असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। यही नाराजगी अब पोस्टरों, चर्चाओं और जन-चर्चा में साफ दिखाई देने लगा है। किसी भी सरकार के लिए एक साल का कार्यकाल केवल सत्ता में बने रहने का समय नहीं होता, बल्कि यह दिखाने का अवसर भी होता है कि लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार आया है। अगर राजधानी की स्थिति में सुधार की जगह अव्यवस्था महसूस हो, तो सवाल उठना तय है। उन्होंने कहा, आज दिल्ली एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां यह तुलना खुलकर सामने आ रही है। लोगों के मन में यह सवाल साफ तौर पर उभर रहा है कि क्या शहर फिर से उस व्यवस्था की ओर लौटेगा, जिसे कभी “दिल्ली मॉडल” के नाम से पहचाना जाता था, या वर्तमान हालात ही उसकी नई पहचान बन जाएंगे।

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