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संस्कृति, संगीत और समुद्र की गहराइयों के बीच आखिर क्या था चेन्नई का पुराना नाम? जानें इसका इतिहास

Chennai Old Name: चेन्नई, दक्षिण भारत का धड़कता हुआ दिल है, जहां परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं। समुद्री हवा, सांस्कृतिक उमंग और तेजी से बढ़ता शहरी जीवन मिलकर इसे एक अनोखी पहचान देते हैं। कला, संगीत और इतिहास से भरा यह शहर हर आने वाले को अपनी गर्मजोशी से जोड़ लेता है। पर क्या आप इसके पुराने नाम के इतिहास को जानते हैं? अगर नहीं तो आइए जानें।

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चेन्नई का पुराना नाम क्या था?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Chennai Old Name: चेन्नई, तमिलनाडु की राजधानी होने के साथ-साथ दक्षिण भारत की धड़कन भी है। बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर बसा यह शहर करीब 200 वर्ग किलोमीटर में फैला है और हर साल धीरे-धीरे और भी फैलता जा रहा है। यहां सिर्फ दफ्तरों और फैक्ट्रियों की हलचल ही नहीं, बल्कि कला, संस्कृति, व्यापार और पढ़ाई का भी बड़ा गजब का संगम है। यही वजह है कि चेन्नई न सिर्फ दक्षिण भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक वाणिज्यिक केंद्र है, बल्कि पूरे देश के प्रमुख सांस्कृतिक और शैक्षिक शहरों में गिना जाता है। भारत के चौथे सबसे बड़े महानगर की पहचान रखने वाले इस शहर की 2011 में अनुमानित आबादी करीब 4.68 मिलियन थी। और हां, अगर समुद्र तट आपकी कमजोरी हैं, तो चेन्नई आपका दिल जीत लेगा। यहां मौजूद 12 किलोमीटर लंबा मरीना बीच दुनिया के सबसे लंबे समुद्र तटों में दूसरे नंबर पर आता है। इतिहास, हरियाली से भरे पार्क, पुराने स्थापत्य और समुद्री हवा सब मिलकर चेन्नई को एक ऐसा शहर बनाते हैं जो हर किसी को अपनी अलग ही ऊर्जा से जोड़ लेता है।

Chennai City (Photo: Canva)

चेन्नई शहर (फोटो: Canva)

चेन्नई का पुराना नाम क्या था?

चेन्नई को पहले मद्रास के नाम से जाना जाता था एक ऐसा नाम जो ब्रिटिश शासन के दौर में खूब प्रचलित रहा। 17वीं शताब्दी में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने दक्षिण भारत में अपने कदम जमाने शुरू किए, तब मद्रास उनके शुरुआती और सबसे अहम शहरों में से एक बनकर उभरा। धीरे-धीरे यह शहर एक चहल-पहल भरी औपनिवेशिक राजधानी और समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र बन गया।

मद्रास नाम कहां से आया, इस पर अभी भी बहस होती रहती है। कुछ लोग मानते हैं कि इसका नाम पास के एक छोटे से मछुआरों के गांव मद्रासपट्टनम से निकला, जबकि कुछ इतिहासकार इसे मद्रा नाम के एक स्थानीय नेता से जोड़ते हैं। जो भी हो, 1639 में अंग्रेजों ने यहां अपना व्यापारिक ठिकाना बनाया और देखते ही देखते यह इलाका मद्रास कहलाने लगा।

बाद में, 1996 में, तमिलनाडु सरकार ने शहर का नाम बदलकर चेन्नई कर दिया। यह नया नाम पास की बस्‍ती चेन्नापट्टनम से प्रेरित है। कहा जाता है कि यह जगह दामरला चेन्नाप्पा नायक नाम के एक स्थानीय तेलुगु शासक से जुड़ी थी, उन्हीं की दी हुई जमीन पर अंग्रेजों ने सेंट जॉर्ज किला खड़ा किया था। आजादी के बाद मूल और स्थानीय नामों को वापस अपनाने की जो लहर चली, उसी का हिस्सा था यह नाम परिवर्तन।

Chennai Culture (Photo: Canva)

चेन्नई की संस्कृति (फोटो: Canva)

चेन्नई की संस्कृति और परंपरा

चेन्नई की संस्कृति इतनी पुरानी है कि मानो इसकी जड़ें सदियों की मिट्टी में गहराई तक धंसी हों। शहर ने समय के साथ कदम जरूर बढ़ाए हैं, मॉल, मेट्रो, टेक पार्क सब आ गए लेकिन अपनी पारंपरिक तमिल पहचान को संभालकर रखने में इसने कभी कंजूसी नहीं की। यही मिश्रण इसे एक साथ पुरातन और बेहद आधुनिक बनाता है। यहां के लोगों में कला की एक खास धड़कन है, खासतौर पर संगीत और नृत्य के लिए। कर्नाटक संगीत तो जैसे चेन्नई की सांसों में बसा हुआ है। हर साल दिसंबर से जनवरी तक शहर में जो ‘मद्रास संगीत सत्र’ होता है, वह अपने आप में एक सांस्कृतिक महाकुंभ जैसा है सैकड़ों कलाकार, अनगिनत कार्यक्रम, और कला प्रेमियों की भीड़। नाटक और रंगमंच भी यहां खूब फलते-फूलते हैं। और अगर बात नृत्य की हो, तो भरतनाट्यम चेन्नई की पहचान जैसा है—एक ऐसा शास्त्रीय नृत्य जो अपनी नफासत, भावनाओं और सौम्यता से दुनिया भर में सराहा जाता है। यूं कहें कि कला और परंपरा की धड़कन चेन्नई के रोजमर्रा के जीवन में ही मिल जाती है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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