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'गुरु का गांव' से मिलेनियम सिटी तक...जानें क्या है महाभारतकालीन गुरुग्राम का इतिहास

History of Gurugram: हरियाणा के दक्षिण-पूर्व में स्थित गुरुग्राम आज आधुनिक शहरी विकास और औद्योगिक प्रगति का प्रतीक बन चुका है। कभी कृषि और व्यापार तक सीमित रहा यह शहर अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों और तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाता है। लेकिन आधुनिक पहचान से पहले, गुरुग्राम का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा एक रोचक अतीत भी समेटे हुए है। ऐसे में आइए जानें इसके बारे में।

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महाभारतकालीन गुरुग्राम का इतिहास

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

History of Gurugram: गुरुग्राम हरियाणा राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में, उत्तर-पश्चिम भारत में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह दिल्ली के उत्तर-पूर्व और रेवाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है तथा सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से दोनों शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से इसे हिदायतपुर के नाम से भी जाना जाता रहा है। पहले गुरुग्राम एक पारंपरिक कृषि और व्यापारिक केंद्र था, लेकिन 20वीं सदी के अंतिम वर्षों में यहां औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ। हर में पावर-लूम बुनाई, ऑटोमोबाइल और कृषि उपकरण निर्माण जैसे उद्योग विकसित हुए।

इसके साथ ही तकनीक, वित्त और विनिर्माण क्षेत्रों की कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने यहां अपने कार्यालय और राष्ट्रीय मुख्यालय स्थापित किए, जिससे गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में तेज़ शहरी विकास हुआ। वर्ष 1991 से 2011 के बीच शहर की आबादी में लगभग सात गुना वृद्धि दर्ज की गई। शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं से होने वाली सिंचाई के कारण अनाज और तिलहन की खेती को बढ़ावा मिला है। जनगणना के अनुसार वर्ष 2001 में शहर की जनसंख्या 1.72 लाख से अधिक थी, जो 2011 तक बढ़कर लगभग 8.77 लाख हो गई, जबकि शहरी समूह की आबादी भी इसी अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। पर क्या आप जानते हैं कि, इस मिलेनियम सिटी का इतिहास महाभारत से जुड़ा है? अगर नहीं तो आइए जानें इसके बारे में।

Places associated with the Mahabharata period

महाभारत काल से जुड़ी जगह

आज के गुरुग्राम का महाभारत से जुड़ाव

गुरुग्राम के नाम की उत्पत्ति प्राचीन हिंदू ग्रंथों में मिलती है, और ऐसा माना जाता है कि यह भूमि जिसे 'गुरु का गांव' कहा जाता था, पौराणिक शासकों पांडवों और कौरवों के स्वामित्व में थी, जिन्होंने इसे अपने युद्धकला के शाही गुरु, गुरु द्रोणाचार्य को उनके प्रशिक्षण के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में भेंट किया था। हरियाणा के सबसे बड़े शहर गुड़गांव का नाम बदल दिया गया है। हरियाणा सरकार ने 12 अप्रैल 2016 को गुड़गांव का नाम बदलकर 'गुरुग्राम' और पड़ोसी मेवात जिले का नाम बदलकर 'नूह' करने का निर्णय लिया। एक अन्य किंवदंती के अनुसार, यह क्षेत्र पांडवों को दान में दिया गया था, न कि उनके मामा को, क्योंकि यह क्षेत्र उनके गुरु को दी गई गुरुदक्षिणा का प्रतीक था। द्रोणाचार्य तालाब आज भी शहर में मौजूद है, जो एक जल भंडार है और अब उपयोग में नहीं है। ऐसा माना जाता है कि यह वही तालाब है जहाँ पांडवों और कौरवों ने खेलते समय अपनी गेंद खो दी थी।

मिलेनियम सिटी का नाम

20वीं सदी के अंतिम वर्षों और 21वीं सदी की शुरुआत में हुए तेज शहरी विस्तार ने गुरुग्राम को “मिलेनियम सिटी” की पहचान दिलाई। यह उपनाम दिल्ली के एक सीमित उपनगर से आधुनिक, समृद्ध और गतिशील महानगरीय केंद्र में हुए उसके रूपांतरण को दर्शाता है। आज यह शहर अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे, तेजी से फैलते कॉर्पोरेट वातावरण और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के लिए जाना जाता है। वर्तमान समय में गुरुग्राम को औद्योगिक और वित्तीय प्रगति के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

Gurugram is today's Millennium City

गुरुग्राम, आज की मिलेनियम सिटी

रोजगार के अवसरों का बड़ा केंद्र

बीते दस वर्षों में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ करने, नए आवासीय परिसरों और विशिष्ट व्यावसायिक हब विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्र इस शहर में मौजूद विकास की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए सक्रिय रूप से आगे आ रहे हैं। लगभग 250 से अधिक कार्यालयों और 500 से ज्यादा फॉर्च्यून कंपनियों की उपस्थिति के कारण गुरुग्राम रोजगार के अवसरों का बड़ा केंद्र बन चुका है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा पेशेवर अपने करियर की शुरुआत के लिए इस शहर को चुनते हैं। इन सभी पहलुओं के चलते गुरुग्राम को सही मायनों में भारत की “मिलेनियम सिटी” कहा जाता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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