क्या आपने कभी ऐसी बारात के बारे में सुना है, जिसमें पूरा शहर ही बाराती बन जाता है। 21 तोपों की सलामी के साथ बारात निकली, साथ में बैंड-बाजे, डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन के साथ सैकड़ों लोग लाल पगड़ी बांधकर नाचते-गाते हुए बरात में शामिल हुए। दूल्हे राजा को किसी की नजर न लगे, इसके लिए नजर उतारी गई और काला टीका भी लगाया गया। जिस दूल्हे की हम बात कर रहे हैं, उसकी बारात हर साल ऐसे ही निकलती है। लेकिन जिसे नहीं पता, वह दूल्हे की शक्ल देखकर दंग रह जाएंगे।
कहां निकली ये अनोखी बारात?
कल यानी बुधवार 4 मार्च को देशभर में होली का त्योहार मनाया जाएगा। आज शाम को चंद्रग्रहण के बाद होलिका दहन का आयोजन होगा। लेकिन इस बीच प्रयागराज में कल रात यानी सोमवार 2 मार्च की देर रात एक अनोखी बारात निकली। संगम नगरी प्रयागराज में निकली इस बारात में जमकर आतिशबाजी भी हुई और खूब रोशनी की गई।
हथौड़ा दूल्हा की अनोखी बारात
प्रयागराज में हर साल होलिका दहन से एक दिन पहले 'हथौड़ा बारात' निकाली जाती है। प्रयागराज में हथौड़ा बारात के साथ ही होली के हुड़दंग की शुरुआत हो जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और अनूठी परंपरा है। इस बारात में बड़ी संख्या में लोग बाराती बनकर शामिल होते हैं।

प्रयागराज में निकलती है यह हथौड़ा बारात
शाही शादी का प्रतीक
हथौड़ा बारात प्रतीकात्मक रूप से 'शाही शादी' का रूप लेती है। बारात की शुरुआत 21 तोपों की सलामी के साथ होती है। इस दौरान बारात में बैंड-बाजे, डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर सैकड़ों लोग लाल पगड़ी बांध कर नाचते-गाते हुए शामिल होते हैं। इस दौरान बारात की भव्यता किसी शाही शादी जैसी होती है।
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सज-धजकर तैयार होते हैं दूल्हे राजा
इस शादी के लिए दूल्हे राजा का विशेष श्रृंगार करके सजाया जाता है। दूल्हे राजा को किसी की बुरी नजर से बचाने के लिए हथौड़े को काला टीका लगाया जाता है और उसकी नजर भी उतारी जाती है। मेहमान और आयोजक दूल्हे राजा की आरती भी उतारते हैं। पूरे रीति-रिवाजों के बाद बारात शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरती है।
प्रयागराज में होली की शुरुआत इसी हथौड़ा बारात से मानी जाती है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। बारात के दौरान बाराती एक-दूसरे पर रंग-गुलाल लगाते हुए आगे बढ़ते हैं।
