Varanasi News: वाराणसी स्थित मां कालरात्रि मंदिर अति प्राचीन है, दूर-दूर से भक्त यहां माता के भव्य रूप का दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के पावर अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा देखा जाता है। मां के सातवां स्वरूप मां कालरात्रि के पूजन का विधान है। बनारस के इस मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। आपको मां दुर्गा के सातवें स्वरूप वाली देवी कालरात्रि के इस मंदिर से जुड़ी खास बातें बताते हैं।
कैसा होता है मां कालरात्रि का स्वरूप?
देवी कालरात्रि का शरीर पूरी तरह अंधकार जैसा काला है। भक्तों के मन में मां कालरात्रि के लिए काफी श्रद्धा है। उनके अद्भुत स्वरूप की हर कोई पूजा करता है, उनके केश बिखरे हुए हैं। मां कालरात्रि उनके गले में मुंड माला बिजली जैसा चमकता रहता है। मां कालरात्रि के तीन आंख होते हं, जो ब्रह्मांड की तरह गोल है। वे अपने नाक से लगातार अग्नि की फुंकार करती रहती हैं।
मां कालरात्रि के आशीर्वाद से भयमुक्त होते हैं भक्त
भले ही उनका रूप भयावह है, मगर अपने भक्तों को माता हमेशा शुभ आशीर्वाद देती हैं, मां के वरदान से श्रद्धालु हर तरह के भय से मुक्त हो जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को निडर जीवन का वरदान देती हैं, वे बेहद शक्तिशाली देवी हैं। मां कालरात्रि के आशीर्वाद से उनके भक्त अग्नि, जल, रात्रि, पशुओं और शत्रुओं आदि के भय से मुक्त रहते हैं।
काशी के इस मंदिर की मान्यता और परंपरा
वाराणसी स्थित मां कालरात्रि मंदिर की गली का नाम 'कालिका गली' है। मान्यता है कि माता के नाम पर ही इसका ये नाम पड़ा। मां कालरात्रि मंदिर वाराणसी के शक्ति पीठों में से एक है। शारदीय नवरात्रि में काशी के इस मंदिर में माता की पूजा का विशेष महत्व है। सुबह 6 बजे से दोपहर 12:30 तक और शाम 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक यह मंदिर खुला रहता है। सुबह और शाम को मंदिर में रोजाना आरती का आयोजन होता है।
बुरी शक्तियों का साया है तो क्या होगा?
अगर किसी व्यक्ति पर बुरी शक्तियों का साया है तो वाराणसी के इस मां कालरात्रि मंदिर में उसका टिकना संभव नहीं होगा। यहां मां को बलि चढ़ाने की परंपरा है। खास बात ये है कि यहां किसी जीव की बलि नहीं चढ़ाई जाती है, बल्कि मां कालरात्रि को नारियल चढ़ाया जाता है। देवी कालरात्रि के दर्शन पूजन से जुड़ी ये मान्यता है कि मां के आशीर्वाद से समस्त ग्रहों के भय और बाधा का नाश होता है।
