Water Taxi: वाराणसी में देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली वाटर टैक्सी सेवा की हुई शुरुआत
- Authored by: आशुतोष सिंह
- Updated Dec 11, 2025, 07:21 PM IST
Hydrogen Powered Water Taxi: भारत का पहला स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर जहाज वाराणसी में कमर्शियल सर्विस शुरू हो गई है। जल मार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पहली यात्रा को हरी झंडी दिखाई।
वाराणसी में देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली वाटर टैक्सी सेवा (फोटो:PIB)
Hydrogen Powered Water Taxi: वाराणसी में देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली वाटर टैक्सी सेवा शुरुआत हुई। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जल मार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। शुरूआत में यह नमो घाट से रविदास घाट तक चलेगी, और भविष्य में इसे असि घाट से मार्कण्डेय धाम तक भी चलाने की योजना है।
इस हाइड्रोजन वाटर टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह वायु और ध्वनि प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त है।वाराणसी में जलसा क्रूज लाइन इसे ऑपरेट कर रही है। यह टैक्सी सुबह-शाम तक हर डेढ़-दो घंटे में सेवा देगी। यह नमो घाट और रविदास घाट के बीच बारी-बारी से चलती रहेगी और पूरे दिन में लगभग 7 से 8 राउंड पूरे करेगी।
यात्रियों के लिए पूरी तरह वेजीटेरियन जलपान की व्यवस्था
सफर के दौरान, यात्रियों के लिए पूरी तरह वेजीटेरियन जलपान की व्यवस्था है। सफाई के लिए बायो टॉयलेट्स लगाए गए हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी हैं। टिकट दर यात्रियों के लिए उचित रखी गई है–₹500 प्रति व्यक्ति। इस नई हाइड्रोजन वाटर टैक्सी के जरिए वाराणसी वासियों और पर्यटकों को गंगा का एक नया, सुरक्षित और स्वच्छ अनुभव मिलेगा, जो न केवल यात्रा को इको-फ्रेंडली बनाता है बल्कि शहर की पर्यटन और जलमार्ग सेवा को भी आधुनिक दिशा देता है।
इसमें पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है
यह जहाज़ भारत में पहला ऐसा जहाज़ है जो समुद्री माहौल में हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन दिखाता है इसमें पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह लो टेम्परेचर प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल सिस्टम पर काम करता है जो स्टोर किए गए हाइड्रोजन को बिजली में बदलता है, और सिर्फ़ पानी को बायप्रोडक्ट के तौर पर निकालता है।
यह कदम एक बड़ा मील का पत्थर
हाइड्रोजन फ्यूल सेल जहाज के कमर्शियल सेवा की शुरुआत भारत के स्वच्छ और अधिक टिकाऊ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रयास में एक बड़ा मील का पत्थर है।