वाराणसी

Navratri Special: वाराणसी में यहां स्थित है प्रसिद्ध बंदी देवी मंदिर, जहां फूल माला की जगह चढ़ते हैं ताला चाबी!

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  • Updated Sep 25, 2022, 10:58 PM IST

Varanasi News: भोलेनाथ की नगरी अपने रहस्यमयी मंदिरों के लिए जानी जाती है। काशी के दशाश्वमेध घाट पर बंदी देवी मंदिर में फूल माला की जगह लोग यहां ताला चाबी चढ़ाने के लिए आते हैं। नवरात्रि में यहां दूर-दूर से भक्तों का माता रानी के दर्शन के लिए आगमन होता है।

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वाराणसी के इस चमत्कारिक देवी मंदिर में चढ़ते हैं ताले चाबी। (Photo- Facebook)

KEY HIGHLIGHTS

  1. वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर है बंदी देवी का मंदिर
  2. मंदिर में ताला चाबी चढ़ाने के पीछे है अनोखा रहस्य
  3. भगवान राम से जुड़ी है मान्यता

Varanasi Bandi Devi Mandir: महादेव की नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा गया है। मंदिरों के इस शहर में कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर विराजमान हैं जिनका धार्मिक महत्व जानने के बाद लोगों की आस्था उनके प्रति स्वत: ही बढ़ जाती है। ऐसा ही एक बंदी देवी का मंदिर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर स्थित है, जहां देवी को फूल माला की जगह ताला चाबा चढ़ाए जाते है। मंदिरों में इन तालों के चढ़ाने के पीछे कई रहस्य छिपे हैं।

बता दें कि वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर बंदी देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है। बंदी देवी को पाताल लोक की देवी माना जाता है। पूरे विश्व में देवी का इकलौता मंदिर काशी में ही है। मान्यता यह है कि, यहां ताला लगाने से बंद किस्मत के ताले माता रानी की कृपा से खुल जाते हैं। यही नहीं कोर्ट कचहरी और मुकदमों के झंझट से भी देवी मां मुक्ति दिला देती हैं। यही वजह है कि देशभर से भक्त यहां नवरात्रि में दर्शन के लिए आते हैं और देवी मां को ताला चाबी चढ़ाते हैं।

जानिए क्या है भगवान राम से जुड़ी कहानी

मंदिर के पुजारी दिनेश शंकर दुबे ने बताया है कि, 41 मंगलवार लगातार देवी के दर्शन से भक्तों की मनचाही मुरादें पूरी हो जाती हैं। त्रेता युग में बंदी देवी माता ने भगवान श्री राम को अहिरावण की कैद से मुक्ति दिला दी थी और कलयुग में कोर्ट कचहरी के बाधा में फंसे भक्तों का मां संकट दूर कर रही हैं।

काशी खंड में मिलता है उल्लेख

जानकारी के लिए बता दें कि दिनेश शंकर दुबे ने बताया है कि, मनोकामना पूर्ति के बाद भक्त यहां लगे ताले को खोलते और फिर अपनी श्रद्धा के मुताबित देवी का श्रृंगार और विशेष पूजन किया करते हैं। इसके अलावा पूरे साल में दो बार देवी का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है। मंदिर के सहायक पुजारी सुधाकर दुबे ने बताया है कि, भगवान विष्णु के आदेश के बाद बंदी देवी कलयुग में भक्तों को कोर्ट कचहरी की बाधा से मुक्ति दिलाने के लिए काशी में विराजमान हुई हैं। काशी खंड में इस बात का उल्लेख भी किया गया है।

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