Vaishali News: जिस उम्र में इंसान अपने पोते-पोतियों के सुकून भरे दिन बिताने का सपना देखता है, उस उम्र में वैशाली जिले के 84 वर्षीय एक बुजुर्ग को जेल जाना पड़ा है। बुजुर्ग के शरीर में इतनी भी ताकत नहीं बची है कि वह बिना किसी सहारे उठ-बैठ पाए। ऐसे में अदालत ने किस जुर्म के लिए उसे सजा सुनाई है। दरअसल यह मामला करीब 34 साल पुराने हत्या के प्रयास का है। जिसमें अदालत ने बुजुर्ग समेत एक ही परिवार के पांच लोगों को दोषी ठहराया है। यह मामला इस बात की मिसाल बन गया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के हाथों से कोई बच नहीं सकता।
बुजुर्ग की उम्र देख सजा हुई कम
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम मनोज कुमार तिवारी ने चार दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जबकि 84 वर्षीय दीपा राय को उसकी कमजोर शारीरिक स्थिति और अधिक उम्र को देखते हुए तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाने के साथ उसे अंतरिम जमानत दे दी।अदालत ने पांचों दोषियों दीपा राय, जगदीश राय, नरेश राय, नागदेव राय और नकेश्वर राय पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्यों मिली 84 साल के बुजुर्ग को सजा?
अतिरिक्त लोक अभियोजक ख्वाजा हसन खान ने बताया, "दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 148 और 307 समेत संबंधित प्रावधानों तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत दोषी करार दिया गया। अदालत ने बुजुर्ग दोषी दीपा राय को अंतरिम जमानत दे दी है।’’
यह मामला 10 नवंबर 1992 को जुरावनपुर थाना क्षेत्र के जुरावनपुर गांव में हुई एक घटना से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता अदालत राय और उनकी पत्नी रामसखी देवी अपने घर के बाहर बैठे थे, तभी दीपा राय और उसके परिवार के अन्य सदस्य हथियारों के साथ वहां पहुंचे और रास्ते पर टूटे हुए कांच बिखेरने लगे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक दंपति ने जब इसका विरोध किया तो उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और बाद में उन पर गोली चलाई गई, जिससे वे घायल हो गए। पुलिस ने मार्च 1993 में मामले में आरोपपत्र दाखिल किया और अदालत ने उसी वर्ष मई में मामले का संज्ञान लिया। 17 जून 1999 को आरोप तय किए गए। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान मामले में नामजद चार आरोपियों की मृत्यु हो गई।
(इनपुट - भाषा)
