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Uttarakhand: रुद्रप्रयाग की पहाड़ियों में गिरा 'रहस्यमयी' ड्रोन, पहले उड़ी हेलीकॉप्टर क्रैश की अफवाह, मौके पर मची अफरा-तफरी!

Uttarakhand Drone Crash: रुद्रप्रयाग के सारी क्षेत्र में एक संदिग्ध ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पहले हेलीकॉप्टर क्रैश की अफवाह उड़ी थी, लेकिन बाद में यह ड्रोन निकला। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

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कोड़ाखाल-बिजराकोट मोटर मार्ग के समीप UAV दुर्घटनाग्रस्त (सांकेतिक चित्र)

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा गतिविधियों के बीच गुरुवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। जनपद रुद्रप्रयाग के सारी क्षेत्र अंतर्गत ककोड़ाखाल-बिजराकोट मोटर मार्ग के समीप दोपहर के समय एक उन्नत मानवरहित हवाई वाहन (UAV) यानी ड्रोन के दुर्घटनाग्रस्त होने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शुरुआत में पहाड़ी ढलान पर गिरे इस विशाल मलबे को देखकर स्थानीय लोगों ने इसे हेलीकॉप्टर हादसा समझ लिया, जिसके बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या किसी नागरिक के घायल होने की कोई सूचना नहीं है।

पहले हेलीकॉप्टर क्रैश की थी आशंका, फिर सामने आया सच

घटना गुरुवार दोपहर की है, जब जिला प्रशासन को फोन के जरिए सूचना मिली कि सारी गांव से कुछ किलोमीटर ऊपर स्थित बिजराकोट क्षेत्र में कोई हवाई वाहन क्रैश हुआ है। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत एक्टिव हो गईं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर स्थिति गंभीर लग रही थी और हेलीकॉप्टर दुर्घटना की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन जब प्रशासनिक टीम और क्षेत्रीय स्रोत मौके पर पहुंचे, तो स्थिति साफ हुई। जांच में स्पष्ट हुआ कि दुर्घटनाग्रस्त वस्तु कोई हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि सेना के इस्तेमाल में आने वाला एक अति-आधुनिक ड्रोन है।

सैन्य प्रशिक्षण में इस्तेमाल होता है यह 'टारगेट ड्रोन'

प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्रैश हुआ यह यूएवी (UAV) 'एनाड्रोन सिस्टम्स' द्वारा निर्मित एक स्वदेशी 'टारगेट ड्रोन' है। यह एक बेहद उन्नत मानवरहित हवाई वाहन है, जिसका मुख्य उपयोग भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना द्वारा प्रशिक्षण सत्रों के दौरान किया जाता है। इसके अलावा मिसाइल और अन्य हथियार प्रणालियों के परीक्षण के समय इसे आसमान में एक 'टारगेट' के रूप में उड़ाया जाता है, जिस पर सुरक्षा बल अचूक निशाना लगाने का अभ्यास करते हैं।

जैसे ही इस आधुनिक सैन्य ड्रोन के क्षतिग्रस्त होकर पहाड़ियों में गिरने की खबर फैली, ककोड़ाखाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर उमड़ पड़ी। प्रशासन का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का पुख्ता खुलासा हो पाएगा कि यह ड्रोन अपने तय रूट से भटककर यहां कैसे गिरा और हादसे की असली वजह क्या थी।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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