बिजनेस

16% सालाना बढ़ रही AYUSH इंडस्ट्री, 2047 तक $318 अरब पहुंचने का अनुमान, 17 लाख को मिला रोजगार

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और वेलनेस का ट्रेंड तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि देश में AYUSH इंडस्ट्री 16% सालाना की रफ्तार से बढ़ रही है। 2047 तक यह इंडस्ट्री 318 अरब डॉलर से ज्यादा की हो जाएगी।

Image

आयुष इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही

AYUSH Industry Growth: बीमार पड़ने के बाद इलाज कराने के बजाय अब लोग हेल्थ और वेलनेस पर पहले से खर्च कर रहे हैं। भारत में प्रिवेंटिव हेल्थ, पारंपरिक चिकित्सा और वेलनेस से जुड़ी AYUSH इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। विकासशील देशों की अनुसंधान और सूचना प्रणाली (RIS) के नए अध्ययन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की AYUSH सेवा अर्थव्यवस्था करीब 36.92 अरब डॉलर की हो चुकी है। वित्त वर्ष 2022-23 से यह सेक्टर 16.91% की CAGR से बढ़ा है।

इस तरह AYUSH अब सिर्फ पारंपरिक इलाज तक सीमित नहीं रहा। आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और इनसे जुड़ी वेलनेस सेवाएं अब एक बड़े सर्विस इकोसिस्टम का हिस्सा बन रही हैं। RIS का अनुमान है कि मौजूदा क्षमता और आने वाले वर्षों में निवेश बढ़ने की स्थिति में AYUSH सेवा अर्थव्यवस्था 2047 तक 216 अरब डॉलर से 318 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

बदल रहा हेल्थ पर खर्च का तरीका

AYUSH इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ के पीछे सिर्फ मरीजों की संख्या बढ़ना ही वजह नहीं है। इसके साथ प्रिवेंटिव हेल्थ, वेलनेस, योग, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट और होलिस्टिक केयर की मांग भी बढ़ रही है। यानी खर्च का फोकस केवल बीमारी के इलाज से हटकर बीमारी से बचाव, फिटनेस और बेहतर जीवनशैली की तरफ बढ़ रहा है। इसी वजह से AYUSH से जुड़ी सेवाओं का दायरा क्लीनिक और अस्पतालों से निकलकर योग सेंटर, स्पा, वेलनेस सेंटर और रिसॉर्ट तक पहुंच गया है। RIS के अनुसार, AYUSH आधारित वेलनेस सेवाओं वाले हिस्से में 21.29% की CAGR दर्ज की गई। खास बात यह है कि सिर्फ दो वर्षों में योग केंद्रों के राजस्व में करीब 75% की वृद्धि हुई है।

36.92 अरब डॉलर की इकोनॉमी

RIS ने राष्ट्रीय स्तर पर 15,914 AYUSH संस्थानों के सर्वे के आधार पर इस अर्थव्यवस्था का अनुमान लगाया है। अध्ययन के मुताबिक AYUSH सर्विस इकोनॉमी में क्लीनिक और डे-केयर सेंटर सबसे बड़ा योगदान दे रहे हैं। दोनों मिलकर कुल सेक्टर रेवेन्यू का 71% से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं। क्लीनिकों से करीब 16.21 अरब डॉलर का रेवेन्यू आया, जबकि डे-केयर सेंटरों का योगदान 10.13 अरब डॉलर रहा। अलग-अलग AYUSH सिस्टम में आयुर्वेद सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। आयुर्वेद से जुड़ी सेवाओं का अनुमानित आर्थिक योगदान करीब 17.73 अरब डॉलर रहा, जो पूरी AYUSH सेवा अर्थव्यवस्था का लगभग 48% है।

17 लाख लोगों को रोजगार

तेजी से बढ़ती AYUSH इंडस्ट्री सिर्फ हेल्थ और वेलनेस पर खर्च नहीं बढ़ा रही, बल्कि रोजगार भी पैदा कर रही है। RIS के मुताबिक, AYUSH सेवा क्षेत्र सीधे तौर पर करीब 17 लाख लोगों की आजीविका को सपोर्ट करता है। इनमें 10 लाख से ज्यादा रोजगार स्थानीय क्लीनिकों में हैं। इसके अलावा इस में महिलाओं की भागीदारी भी अहम है। कुल AYUSH वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 43% है। कुछ सेगमेंट में यह हिस्सेदारी 50% से भी ज्यादा है। आयुष आधारित स्पा और रिसॉर्ट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 60% से ज्यादा, शैक्षणिक संस्थानों में 58%, डे-केयर सेंटरों में 57% और अस्पतालों में करीब 53% बताई गई है।

विदेशी मरीजों से 1.77 अरब डॉलर की कमाई

AYUSH इंडस्ट्री के लिए एक और बड़ा अवसर Medical Value Travel यानी मेडिकल टूरिज्म है। RIS के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में AYUSH सेक्टर ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल से अनुमानित 1.77 अरब डॉलर का राजस्व हासिल किया। विदेशी मरीजों की संख्या कुल मरीजों का करीब 5% ही है, लेकिन अस्पतालों के कुल राजस्व में उनका योगदान 15% से 25% तक है। इसका एक कारण AYUSH की ऐसी थैरेपीज भी हैं, जिनमें मरीजों का ठहराव सामान्य इलाज की तुलना में ज्यादा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पंचकर्म और रेजिडेंशियल योग जैसी सेवाओं के कारण अस्पतालों में मरीजों के रुकने की औसत अवधि करीब 5 से 11 दिन तक रहती है।

2047 तक $318 अरब की संभावना

RIS ने AYUSH सेवा अर्थव्यवस्था के लिए 2047 तक 216 अरब से 318 अरब डॉलर का संभावित आकार बताया है। हालांकि इसके लिए सेक्टर को कई मोर्चों पर तेजी से विस्तार करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी सिस्टम, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मजबूत करने पर AYUSH इकोनॉमी में बड़ा विस्तार संभव है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article