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Losar Festival: गढ़वाल में रंगो से नहीं आटे से खेली जाती है होली, जाने क्यों

उत्तराखंड में अलग-अलग तरह के त्योहार और परंपराएं देखने को मिलती हैं। उन्हीं में से एक है यहां का लोसर त्योहार, जो यहां की मान्यताओं और परंपराओं से रूबरू कराता है। यह त्योहार 15 दिनों तक मनाया जाता है। आइए आज हम आपको लोसर की खासियत के बारे में बताते हैं।

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उत्तराखंड, लोसर पर्व

Photo : Twitter

देवभूमि उत्तराखंड अपनी संस्कृति और धार्मिक स्थलों के लिए मशहूर है। यहां अलग-अलग तरह के त्योहार और परंपराएं देखने को मिलती हैं। उन्हीं में से एक है त्योहार है यहां का लोसर, जो यहां की मान्यताओं और परंपराओं से रूबरू कराता है। इस त्योहार को भारत-चीन सीमा से सटे गांवों में भोटिया जनजाति समाज के लोग मनाते हैं। इस त्योहार पर भोटिया और तिब्बती समुदाय की सांस्कृतिक का अद्भुत नजारा देखने को मिलती है।

उत्तरकाशी में भी भोटिया समुदाय के लोगों द्वारा लोसर पर्व को मनाया जाता है, जिसमें वीरपुर और डुंडा समेत अन्य क्षेत्रों में भी लोसर मनाया जाता है। यहां के रिंगाली देवी मंदिर में लगभग 300 से ज्यादा परिवार एकत्र होते हैं, जहां पारंपरिक परिधान पहनकर महिलाएं नृत्य भी करती हैं।

चौथे दिन खेली जाती है होली

यहां के मंदिर में भारी अनुष्ठान करते हैं। वहीं दूसरे दिन घर-घर जाकर हरियाली बांटी जाती है और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। तीसरे दिन ब्याही गई बेटियों को मायके बुलाया जाता है और उनका आदर सत्कार किया जाता है, जिसके बाद चौथे दिन आटे की होली खेली जाती है। इस दिन यहां एक दूसरे पर आटा लगाकर त्योहार को मनाते हैं। सभी पारंपरिक वेशभूषा पहन कर स्थानीय लोक गीतों पर नाचते-गाते हैं।

क्यों मनाते हैं लोसर ?

लोसर पर कई क्षेत्रों में लोसर पर्व के अवसर पर दीपावली की तरह दीए भी जलाए जाते हैं। होली खेली जाती है। यहां के लोग बौद्ध पंचांग के अनुसार लोसर पर्व नए साल के आगमन पर मनाते हैं। इस दिन ही तिब्बत की देवी पाल्डेन ल्हामो की आराधना होती है। पूर्वजों को भी याद किया जाता है।

15 दिनों का होता है लोसर

उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं, नैनीताल, उत्तरकाशी समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में भी लोसर मनाया जाता है। हिमाचल, लद्दाख, नेपाल में भी भोटिया और तिब्बती समुदाय के लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं। सभी लोग धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। यह त्योहार लगभग 15 दिनों तक चलता है।

Maahi Yashodhar
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माही यशोधर Timesnowhindi.com में न्यूज डेस्क पर काम करती हैं। यहां वह फीचर, इंफ्रा, डेवलपमेंट, पॉलिटिक्स न्यूज कवर करती हैं। इसके अलावा वह डेवलपमेंट की खबरों पर भी नजर रखती हैं। वह सड़क, रेल और इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा क्राइम और पर्यावरण से जुड़ी खबरें भी लिखती हैं। राजनीति में खास रुचि होने के कारण वह राजनेताओं और राजनीति से जुड़ी खबरें ब्रेक करते हैं। इससे पहले माही ने देश के नामी मीडिया संस्थानों एनडी टीवी और न्यूज18 में काम किया है। माही यशोधर ने पत्रकारिता में डिग्री ली है। उन्होंने अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत देश के नामी संस्थान टाइम्स से की थी, जहां उन्होंने एंटरटेनमेंट डेस्क पर रहते हुए खबरों को धार दी। इसके बाद वह डिजिटल पत्रकारिता में आगे बढ़ती रहीं। पूर्व में माही यशोधर ने एंटरटेनमेंट, हेल्थ, एजुकेशन, एस्ट्रो, वायरल और लाइफस्टाइल की खबरों पर काम किया है। माही हर छोटी-बड़ी खबर को जल्द से जल्द अपने पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। माही अपने पाठकों की नब्ज अच्छे से समझती हैं। उन्हें खबरों की अच्छी समझ है और उनकी भाषा ऐसी है कि कम शब्दों में भी पाठक को पूरी खबर समझा देती हैं।

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