UP News: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। नीट (NEET) की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय अभ्यर्थी रितिक मिश्रा ने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण मौत को गले लगा लिया। रितिक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
तीन साल की मेहनत और पेपर लीक का दंश
रितिक मिश्रा सदर कोतवाली इलाके के मोहल्ला गंगोत्री नगर में रहकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे। उनके पिता अनूप मिश्रा ने बताया कि रितिक ने तीन बार नीट की परीक्षा दी थी। पिछली बार कुछ नंबरों से चयन रुक गया था, लेकिन इस बार उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ था। रितिक को पूरा भरोसा था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा, लेकिन नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों और फिर परीक्षा रद्द होने की खबर ने उसे तोड़ दिया। दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरने के तनाव और अनिश्चित भविष्य से परेशान होकर उसने अपने कमरे में फांसी लगा ली।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। खीरी पुलिस के अनुसार, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि मौके से अभी तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन परिवार का कहना है कि वह परीक्षा रद्द होने के बाद से ही गहरे तनाव में था। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में आक्रोश
रितिक की मौत के बाद विपक्षी दल भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया 'X' पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा, "उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक, भाजपा सरकार के राज में 'पेपर लीक' एक लाइलाज बीमारी बन चुका है। विज्ञापन में 'रामराज्य' का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार के असल राज्य में छात्र डिग्रियां नहीं, मौत गले लगा रहे हैं।"
देशभर से आ रही हैं दुखद खबरें
नीट परीक्षा रद्द होने का असर केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। हाल ही में गोवा के कुर्टोरिम (नेसाई) इलाके में भी एक 17 वर्षीय छात्र ने इसी तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। उस छात्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अब दोबारा किसी कॉम्पिटिशन एग्जाम की प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहता। ये घटनाएं चीख-चीखकर कह रही हैं कि पेपर लीक केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा एक जघन्य अपराध है।
