साल 2015 में आई बॉलीवुड फिल्म "दम लगा के हईशा" का एक फेमस गाना है, जिसकी कुछ लाइनें आज -कल के मौसम को बेहद सही ढंग से बयान करती हैं। लाइनें कुछ ऐसे है कि- "अभी अभी धुप थी यहां पे लो...अब बरसातों की धारा।" उत्तर भारत समेत देश के कई भागों में मौसम का मिजाज कुछ ऐसे ही है। कभी धूप तो कभी बारिश और तो और गरज-चमक, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली भी। मानो सावन-भादो समय से पहले ही आ चुका है। इस बेमौसम बरसात से देश के अन्नदाताओं यानी किसानों को विशेषकर नुकसान झेलना पड़ा है या कह लीजिए कि उनकी मेहनत में पानी फिर गया। बता दें कि, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पकी हुई रबी फसलों (विशेषकर गेहूं, सरसों, चना) को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज हवाओं से फसलें खेतों में बिछ गईं, दानों का रंग काला पड़ गया और कटाई का काम रुक गया है। यह बारिश सीधे तौर पर तैयार फसल की गुणवत्ता और मात्रा को कम कर रही है।
अप्रैल में अचानक बदला मौसम का मिजाज
अप्रैल में अचानक बारिश और ठंडी हवाओं ने लोगों को चौंका दिया है। जहां इस समय तेज धूप और गर्मी होनी चाहिए थी, वहां मौसम ने अपनी अलग ही तेवर दिखाया है। भारत में अप्रैल को पारंपरिक रूप से गर्मियों के आगमन का संकेत माना जाता है, जब सूरज की किरणें सीधे पड़ती हैं और लू (Heat Wave) चलने लगती है। लेकिन हाल के सालों में अप्रैल के महीने में असामान्य रूप से बारिश, ओलावृष्टि और ठंडी हवाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। इस साल भी यही पैटर्न देखने को मिल रहा है, जिसका कारण वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अन्य प्राकृतिक कारक हो सकते हैं।
आखिर क्या है मौसम बदलने की वजह?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि, इन दिनों क्लाइमेट चेंज के मुख्य रूप से चार कारण हैं, जिसके बारे में आइए एक-एक करके जानें।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): यह अप्रैल में बारिश होने का सबसे अहम कारण माना जाता है। पश्चिमी विक्षोभ कम दबाव वाले तूफान होते हैं जो भूमध्य सागर से उठकर ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए उत्तर भारत तक पहुंचते हैं। जब ये ठंडी हवाएं हिमालय से टकराती हैं, तो उत्तर और मध्य भारत में बारिश और ओलावृष्टि होती है।
चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation): कभी-कभी राजस्थान या मध्य प्रदेश के ऊपर हवा का कम दबाव वाला क्षेत्र बन जाता है। यह क्षेत्र अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींचता है। जब ऊपर की ठंडी हवा और नीचे की नमी वाली गर्म हवा मिलती है, तो अचानक तेज आंधी और बारिश शुरू हो जाती है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change): ग्लोबल वार्मिंग के चलते पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे समुद्र में जलस्तर और नमी की मात्रा बढ़ गई है। यही कारण है कि अब मौसम पहले जैसी नियमितता नहीं दिखाता और बेमौसम बारिश आम हो गई है।
जेट स्ट्रीम की स्थिति (Jet Stream): वायुमंडल की ऊपरी परत में बहने वाली तेज हवाएं, जिन्हें जेट स्ट्रीम कहते हैं, कई बार दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं। ये हवाएं ठंडा मौसम लाती हैं, जिससे तापमान में अचानक गिरावट होती है और लोग ठंड महसूस करने लगते हैं।
नॉर्थ टू साउथ-ईस्ट टू वेस्ट कब तक होगी बारिश?
भारत में अगले कुछ दिनों के मौसम का हाल देखते हुए और IMD द्वारा जारी पूर्वानुमान के तहत यह कहा जा सकता है कि बारिश वाला मौसम कई हिस्सों में जारी रहेगा। 8 अप्रैल को सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तेज बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। वहीं, पूर्वी भारत में भी हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और आंधी चलने की आशंका है। अगले 3-4 दिनों तक दिन का तापमान उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहेगा, जिसके बाद धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।
उत्तर-पश्चिम भारत के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 8 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी के साथ गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी 8 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत में अगले 5 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और त्रिपुरा में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की आशंका है।
पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, सिक्किम और ओड़िशा में 8 से 12 अप्रैल के बीच बारिश, गरज-चमक, तेज हवाओं और कहीं-कहीं ओलावृष्टि का मौसम बने रहने की संभावना है। मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 8 से 9 अप्रैल के दौरान हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना है।
दक्षिणी भारत के तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा में 8 अप्रैल को हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि तमिलनाडु और तेलंगाना में भी 8 अप्रैल को बिजली गिरने की संभावना है। इस तरह, भारत के अधिकांश हिस्सों में 8 अप्रैल के बाद भी कई दिनों तक बारिश और अस्थिर मौसम बना रहेगा। ऐसे में यह बता पाना मुश्किल है कि बारिश कब तक होगी?
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