पिता के निधन के बाद बेटियों को कैसे मिलेगी पेंशन? मध्य प्रदेश सरकार के नए नियमों को जान लें
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 10, 2026, 10:12 PM IST
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बेटियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम 44 में संशोधन करते हुए अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों को पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र सदस्यों की सूची में शामिल किया है।
मध्य प्रदेश सरकार का एतिहासिक फैसला।
मध्य प्रदेश सरकार ने अविवाहित बेटियों के साथ-साथ विधवा और तलाकशुदा बेटियों को भी पारिवारिक पेंशन के दायरे में लाने का फैसला किया है। यह निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 के नियम 44 में संशोधन करते हुए अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों को पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र सदस्यों की सूची में शामिल किया है।
नए पेंशन नियमों को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 और मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन की कम्यूटेशन) नियमावली को भी स्वीकृति दी है तथा वित्त विभाग को इन नियमों के प्रकाशन के लिए अधिकृत किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित नियमों से प्रक्रियाएं और अधिकार-क्षेत्र सरल होंगे, जिससे पेंशन से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा संभव होगा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन कम्यूटेशन और उसकी गणना भी आसान होगी।
एनपीएस से जुड़े प्रावधान
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का क्रियान्वयन) नियम, 2026 और एनपीएस के तहत ग्रेच्युटी भुगतान संबंधी नियमों को भी मंजूरी दी है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
नए प्रावधानों में सदस्य की मृत्यु की स्थिति में पारिवारिक पेंशन,स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका, केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में की गई पूर्व सेवा का संयोजन, निलंबन अवधि में अंशदान (कर्मचारी और नियोक्ता) से जुड़े प्रावधान, अंशदान दरें, गणना, देरी पर जिम्मेदारी तय करने, सेवानिवृत्ति/स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति/त्यागपत्र/मृत्यु की स्थिति में निकास की स्पष्ट प्रक्रिया शामिल हैं। साथ ही एनपीएस के अंतर्गत आने वाले सरकारी नौकरों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता और भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था भी तय की गई है।
जांच के बाद वसूली और रोक के प्रावधान
नियमों में विभागीय जांच (सेवानिवृत्ति के बाद) के आदेश के आधार पर ग्रेच्युटी से वसूली, जांच के दौरान नियोक्ता अंशदान रोकने, सेवानिवृत्ति से तीन माह पहले सदस्य अंशदान रोकने, सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच शुरू करने तथा राज्य सरकार को नियम समाप्त/शिथिल करने की शक्ति जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।
भाजपा ने बताया कल्याणकारी फैसला
इस फैसले को सरकार की मानवीय पहल बताते हुए प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि यह सिर्फ पेंशन नहीं, बेटियों के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी है। उन्होंने इसे संवेदनशीलता से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि पिता के निधन के बाद अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी पारिवारिक पेंशन की हकदार होंगी।
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