शहर

बाराबंकी के इस गांव से जुड़ी थी ईरान के सर्वोच्च नेता की विरासत; खामेनेई की मौत के बाद कैसे हैं हालात, जानें

अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र का ऐतिहासिक रिश्ता खामेनेई के गुरु अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी के परिवार से जुड़ा रहा है। इसी पारिवारिक संबंध और विरासत को याद करते हुए स्थानीय लोग गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।

Image

अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद यूपी के इस गांव में मातम (फोटो: PTI)

Photo : PTI

Israel Attacks Iran: अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बदोसराय क्षेत्र के किंतूर गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि खामेनेई के गुरु अयातुल्ला खुमैनी का पुश्तैनी रिश्ता इसी गांव से था। बताया जाता है कि उनके पूर्वज करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले यहां से ईरान चले गए थे। समय के साथ परिस्थितियां बदल गईं, लेकिन गांव के लोग आज भी उस पारिवारिक विरासत और ऐतिहासिक जुड़ाव को याद करते हैं। खुद को खुमैनी का वंशज बताने वाले सैयद निहाल अहमद काजमी के अनुसार, बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र में स्थित किंतूर गांव, वर्ष 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व करने वाले अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी का जन्मस्थान माना जाता है।

कौन थे सैयद अहमद मुसावी?

काजमी के अनुसार, सैयद अहमद मुसावी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1834 में मुसावी एक धार्मिक यात्रा के सिलसिले में ईरान गए थे। चूंकि वे आजादी की लड़ाई से जुड़े हुए थे, इसलिए उस समय की ब्रिटिश सरकार ने उन्हें भारत वापस आने की इजाजत नहीं दी। काजमी ने आगे कहा कि इसके बाद मुसावी ईरान के प्रसिद्ध शैक्षणिक केंद्र माने जाने वाले खुमैन शहर में बस गए। वहीं उनके परिवार में आगे चलकर उनके पोते अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी का जन्म हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि अयातुल्ला अली खामेनेई, खुमैनी के शिष्य रहे और उनके निधन के बाद उन्होंने ही उनकी विचारधारा और नेतृत्व की विरासत को आगे बढ़ाया।

किंतूर गांव का ईरान से ऐतिहासिक संबंध

काजमी ने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे मानवता के खिलाफ कदम बताया। उनके भतीजे और अयातुल्ला रूहुल्लाह मुसावी खुमैनी के पोते डॉ. सैयद रेहान काजमी ने कहा कि किंतूर गांव का ईरान से ऐतिहासिक संबंध रहा है, क्योंकि यह कभी ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खुमैनी का पैतृक स्थान माना जाता है। रेहान के मुताबिक, उनके परदादा के शिष्य रहे अयातुल्ला खामेनेई के निधन से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि विश्वभर के मुसलमानों को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मार्गदर्शक को खोना, जिसे वे मानवता का हितैषी मानते हैं, अत्यंत दुखद है।

"हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं होती"

किंतूर निवासी सैयद हुसैन जैदी ने अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर गहरा शोक और नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि खामेनेई केवल मुस्लिम समुदाय के ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के मार्गदर्शक थे। उन्होंने अमेरिका और इजराइल की इस कार्रवाई को आतंकी बताते हुए लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम सभी से निवेदन करते हैं कि शांति कायम रखें, क्योंकि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं होती।” खामेनेई की मौक की खबर फैलते ही किंतूर और आसपास के क्षेत्रों में लोग बड़ी संख्या में एकत्र होने लगे। कई जगहों पर दुआ फातिहा का आयोजन किया गया और दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की गईं। कई जगहों पर शोक सभाएं भी आयोजित की गईं, जहां लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लिए दुआ की।

(इनपुट - भाषा)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article