देश

अरुणाचल प्रदेश के बिचोम में भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई तीव्रता, कोई खतरा तो नहीं?

Magnitude 2.9 Earthquake Arunachal: अरुणाचल प्रदेश के बिचोम (Bichom) क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर 2.9 तीव्रता का कम तीव्रता वाला भूकंप दर्ज किया गया।

Image

अरुणाचल प्रदेश के बिचोम में भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 2.9 मापी गई तीव्रता, कोई खतरा तो नहीं? (प्रतीकात्मक फोटो) istock

Earthquake in Bichom Arunachal Pradesh: उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के बिचोम (Bichom) और आसपास के क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.9 दर्ज की गई है। कम तीव्रता का भूकंप होने के कारण क्षेत्र में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या संपत्ति के क्षतिग्रस्त होने की खबर नहीं है।

भूकंप से जुड़े मुख्य बिंदु

-तीव्रता: 2.9 (माइक्रो / कम तीव्रता)

-स्थान: बिचोम (Bichom), अरुणाचल प्रदेश

-प्रभाव: कोई नुकसान या हताहत नहीं

हिमालयी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र भूकंपीय रूप से अत्यधिक संवेदनशील (Seismic Zone V) माने जाते हैं, जहां इस प्रकार के हल्के झटके समय-समय पर दर्ज किए जाते हैं।

इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुकाबिक, भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच होने वाले लगातार दबाव के कारण पूर्वोत्तर भारत की हिमालयी श्रृंखला में इस तरह की भूकंपीय गतिविधियां आम हैं। इससे पहले भी राज्य के ऊपरी सियांग (Upper Siang) और कुरुंग कुमे (Kurung Kumey) जिलों में 2.9 से लेकर 5.1 तीव्रता तक के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि अधिकांश झटके कम तीव्रता के होते हैं, लेकिन वे भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्षेत्र में जारी हलचल का संकेत देते हैं।

2.9 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?

भूकंप विज्ञान (Seismology) के अनुसार, 3.0 से कम तीव्रता वाले भूकंपों को अति-हल्का या 'माइक्रो' श्रेणी में रखा जाता है। इस तीव्रता के झटके आमतौर पर केवल सिस्मोग्राफ (Seismograph) पर दर्ज होते हैं या भूकंप के केंद्र (Epicenter) के बेहद करीब स्थित लोगों द्वारा ही हल्के रूप में महसूस किए जाते हैं। इससे किसी भी प्रकार के बुनियादी ढांचे, इमारतों या सड़कों को नुकसान पहुंचने की संभावना न के बराबर होती है।

वहीं, जैसे कि अरुणाचल प्रदेश सिस्मोनिक जोन-5 में आता है, स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) निवासियों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं। पहाड़ी इलाकों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण में सुरक्षित तकनीकों का पालन करने के दिशानिर्देश हमेशा दिए जाते हैं। साथ ही घरों में आवश्यक दवाइयां, टॉर्च और सूखा राशन तैयार रखने के लिए भी कहा जाता है। इसके अलावा तीव्र झटके महसूस होने पर खुले मैदान में जाने या किसी मजबूत मेज/टेबल के नीचे शरण लेने की मानक प्रक्रिया आपको ध्यान रखनी चाहिए।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!