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छोटा नागपुर का शिमला है ये हिल स्टेशन, खूबसूरती ऐसी कि शिमला, मनाली, नैनीताल और मसूरी भी फेल!

शिमला, मनाली जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन तो आप गए होंगे। लेकिन आज हम आपको लेकर चल रहे हैं छोटानागपुर के शिमला कहे जाने वाले हिल स्टेशन पर। यह हिल स्टेशन इतना खूबसूरत है कि आपका यहां से जाने का मन ही नहीं करेगा। ऊपर से यहां भीड़भाड़ भी काफी कम होती है।

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यहां की हरी-भरी वादियां आपका मन मोह लेंगी

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घने जंगल, पहाड़ों की वादियों का अद्भुत नजारा, छोटे-छोटे झरने और शांत वातावरण। जब भी यह सब कुछ एक साथ मिलते हैं तो शिमला, मनाली या ऐसे ही किसी पहाड़ी हिल स्टेशन का नाम याद आता है। फिर पलक झपकते ही वहां की हसीन तस्वीरें भी आंखों में तैरने लगती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिमला की ही तरह बहुत ही खूबूसरत एक जगह झारखंड में भी है। बल्कि इस जगह को तो लोग 'छोटानागपुर का शिमला' ही कहते हैं। तो फिर देर किस बात की चलिए जानते हैं आखिर कहां है यह 'छोटानागपुर का शिमला' और इसका असली नाम क्या है? आखिर यह किस जिले में आता है।

नाम क्या है?

इतनी भूमिका के बाद पहला प्रश्न यही हो सकता था। तो बिना देर किए बता दें कि 'छोटानागपुर का शिमला' कहलाने वाली इस जगह का नाम नेतरहाट है। अब आप समझ ही गए होंगे कि क्यों इसे छोटानागपुर का शिमला कहा जाता है। झारखंड के लातेहार जिले में यह एक बहुत ही खूबसूरत सा हिल स्टेशन है। झारखंड के पश्चिमी मध्य हिस्से में नेतरहाट समुद्रतल से 1128 मीटर यानी 3701 फीट की ऊंचाई पर बसा है।

छोटानागपुर का यह क्षेत्र एक पठारी इलाका है, जहां पर घने जंगल हैं। नेतरहाट का पठार करीब साढ़े 6 किमी लंबा और करीब 4 किमी चौड़ा है। यहां पर क्रिस्टलीय चट्टानें हैं, जबकि इसके शिखर पर बलुआ पत्थर या लेटराइट है। यहां पर साल, केंदू, महुआ और यूकेलिप्टस के पेड़ काफी मात्रा में हैं।

सनराइज और सनसेट प्वाइंट

नेतरहाट को छोटानागपुर की रानी (Queen of Chotanagpur) भी कहते हैं। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती मन मोह लेती है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त (Sunrise and Sunset) का नजारा अद्भुत होता है। शिमला, मनाली, नैनीताल, मसूरी जैसे हिल स्टेशनों की बजाय नेतरहाट के बारे में कम ही लोग जानते हैं। इसलिए यहां पर पर्यटकों का दबाव काफी कम है और यही इसकी खूबसूरती भी है।

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नेतरहाट की खूबसूरती

क्यों मशहूर है नेतरहाट

नेतरहाट भले ही नैनीताल, मसूरी, शिमला, मनाली की रह मशहूर न हो। लेकिन यह जगह अपने रेजिडेंशियल स्कूल के लिए बहुत ही मशहूर है। नेतरहाट स्कूल का अपना रुतबा है। 1954 में बने नेतरहाट आवासीय विद्यालय को देश के सबसे अच्छे रेजिडेंशियल स्कूलों में से एक माना जाता है। इस स्कूल को अपनी बेहतरीन शिक्षा के लिए सिर्फ झारखंड और बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जाना जाता है।

नेतरहाट में क्या कुछ है

नेतरहाट में प्राकृतिक खूबसूरती अद्भुत है। यहां की कुछ जगहों की लिस्ट हम हां दे रहे हैं -

  • मघा घाटी
  • लोध फॉल : यह झारखंड का सबसे ऊंचा वाटर फॉल है। यह नेतरहाट से करीब 70 किमी दूर है।
  • सेरेंडा डंडा : यह एक खूबसूरत पिकनिक प्वाइंट है।
  • अपर घाघरी वाटर फॉल : प्रकृति प्रेमियों के लिए यह आदर्श जगह है और सिर्फ 4 किमी दूर है।
  • मग्नोलिया प्वाइंट : नेतरहाट से करीब 10 किमी दूर यह सनसेट प्वाइंट है।
  • लोअर घाघरी फॉल : यह वाटर फॉल नेतरहाट से करीब 10 किमी दूर है।
  • इनके अलावा लेक पार्क, सनराइज पार्क, नैना फॉल भी यहां पर हैं।

बड़े शहरों से दूरी

छोटानागपुर की रानी होने के नाते नेतरहाट अपने आसपास के बड़े शहरों से अच्छी तरह से कनेक्टिड है। झारखंड की राजधानी रांची से नेतरहाट सिर्फ 156 किमी दूर है। डाल्टनगंज से नेतरहाट की दूरी करीब 118 किमी और जिला मुख्यालय लातेहार से लगभग 80 किमी की दूरी पर यह खूबसूरत हिल स्टेशन है। नेतरहाल एक हिल स्टेशन है और यहां का मौसम पूरे साल सुहावना रहता है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पर्यटक यहां गर्मियों में सुकून के पल ढूंढ़ते हुए आते हैं। विशेष रूप से मार्च से जून और अक्टूबर से दिसंबर के बीच यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने का अलग ही लुत्फ है।

नेतरहाट का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन लातेहार में है इसके अलावा डाल्टनगंज भी यहां का नजदीकी स्टेशन है। दिल्ली, हावड़ा, पटना और रांची से लातेहार और डाल्टनगंज के लिए ट्रेनें चलती हैं। इन दोनों ही रेलवे स्टेशनों से टैक्सी या बस लेकर नेतरहाट पहुंच सकते हैं। जैसा कि हमने ऊपर बताया नेतरहाट मशहूर हिल स्टेशन शिमला, मनाली या नैनीताल, मसूरी जैसा मशहूर नहीं है। इसलिए यहां आने से पहले अच्छी प्लानिंग करें, क्योंकि यहां पर होटल या ठहरने के विकल्प सीमित है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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