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भयानक है यहां की सुंदरता, किले के हर कोने में भुतहा साया; कमजोर दिल वालों के लिए नहीं ये जगह

हम आपको लेकर जाएंगे शहर-शहर भुतहा डगर पर। आपके अपने शहर के अंदर ही हम आपको ऐसी भुतहा जगहों के बारे में जानकारी देंगे, जहां जाने की हिम्मत हर किसी की नहीं होती। अगर आपका दिल कमजोर है तो आप भी इस आर्टिकल को पढ़ लें, यहां जाने की गलती न करें।

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भुतहा सायों का किला

Photo : Times Now Digital

शहर-शहर भुतहा डगर : इस सीरीज में बात होगी भूत और भुतहा जगहों की। बच्चे और जिन लोगों का दिल कमजोर है, वह इन जगहों से दूर ही रहें। हालांकि, हमारे इस आर्टिकल को पढ़कर वह अपनी नसों में तेजी से बहते हुए खून को जरूर महसूस कर सकते हैं। ब्लड प्रेशर को और भी बढ़ाने के लिए बता दें कि आज हम बात करेंगे देश की सबसे ज्यादा डरावनी जगह के बारे हैं। उस जगह के बारे में जो अधूरे प्रेम का प्रतीक है। कहानी उस जगह की है जो प्रेम, तंत्र-मंत्र और श्राप की आग में ऐसी झुलसी की फिर कभी आबाद नहीं हुई। सीने में हिम्मत जुटाएं, दिमाग को शांत करें और चलें भानगढ़ की कहानी को जानें -

कहां हैं भानगढ़?

भानगढ़ का किला भले ही देश में सबसे डरावनी जगह हो, लेकिन यह उतना ही खूबसूरत भी है। इस किले की खूबसूरती आपको मोहित कर देगी। दिन में जो किला खूबसूरती की लबादा ओढ़े हुए पर्यटकों को आकर्षित करता है, वही किला शाम ढलते ही खौफ का दूसरा नाम बन जाता है। यह किला जयपुर और अलवर के बीच अरावली की पहाड़ियों में है। मशहूर सरिस्का वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी से यह महज 50 किमी की दूरी पर है।

जी हां, भानगढ़ का किला हॉन्टेंड जगह है, लेकिन समृद्ध आर्कियोलॉजिकल हेरिटेज और आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारने के लिए यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। अगर आपको इतिहास में रुचि है, अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं और प्राकृतिक खूबसूरती आपको लुभाती है तो यह ऐतिहासिक धरोहर आपके स्वागत के लिए खड़ी है।

किसने और कब बनाया भानगढ़ का किला?

माना जाता है कि भानगढ़ के किले को 17वीं शताब्दी में राजपूत राजा मान सिंह प्रथम ने बनवाया था। कहा जाता है कि मान सिंह ने अपने पोते माधो सिंह प्रथम के लिए इस किले का निर्माण करवाया था। इस किले से कई लोककथाएं, रहस्य और समृद्ध इतिहास जुड़ा है। इस किले की वास्तुकला, बीते युग की भव्यता और शिल्प कला का प्रमाण है।

लाहौरी गेट, अजमेरी गेट और दिल्ली गेट

भानगढ़ के किले में ऊंची-ऊंची दीवारें हैं। यहां कई खूबसूरत मंदिर हैं, महल, हवेलियां और कई ऐसी जगहें हैं जो आश्चर्यचकित कर देती हैं। यह किला पर्यटकों को अपना गौरवशाली इतिहास खुद-ब-खुद बयां करता हुआ प्रतीत होता है। किले में प्रवेश के लिए चार प्रमुख गेट हैं, जिनके नाम लाहौरी गेट, अजमेरी गेट, दिल्ली गेट और फूलबाड़ी गेट हैं। सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बावजूद आज भी किला और उसके आसपास की जगहें अच्छी तरह से मेनटेन्ड हैं।

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भानगढ़ का किला

किले की भयानक सुंदरता

भयानक और सुंदरता दो बिल्कुल बेमेल शब्दों का जीता-जाता उदाहरण है भानगढ़ का किला। किले आड़े-टेड़े गलियारों और आंगन से गुजरते हुए पर्यटक यहां की भयानक सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं। भयानक इसलिए क्योंकि माना जाता है कि यहां के हर एक पत्थर में, हर एक कोने में और दीवार में भुतहा साया है। लेकिन सदियों पुरानी किले की यह दीवारें खूबसूरत भी हैं। जहां कभी दरबार लगता होगा, जहां मंत्री राजा के साथ विचार-विमर्श करते होंगे। आज उसी दरबार और किले की खामोशी भी डराती है। किले के अंदर सोमेश्वर मंदिर भी है, जो स्थानीय लोगों के प्रमुख देवता हैं। डरावने किले में मंदिर मन को शांति प्रदान करता है।

काले जादू और तांत्रिक की कहानी

किवदंती के अनुसार यहां एक तांत्रिक था, जिसे भानगढ़ की खूबसूरत राजकुमारी से प्यार हो गया था। राजकुमारी की सुंदरता के कई कायल थे। एक दिन पुजारी ने राजुकमारी का पीछा किया। वह एक बाजार गया और राजकुमारी को एक प्रेम औषधि भेंट की। पुजारी ने जो औषधि राजकुमार को भेंट करना चाही, अगर वह ले लेती तो वह तांत्रिक से प्रेम करने लगती। लेकिन राजकुमारी ने भेंट लेने से इनकार कर दिया और उसे एक चट्टान पर पेंक दिया। बस फिर क्या था, यह चट्टान तांत्रिक की तरफ आकर्षित हो गई और उसकी तरफ लुढ़कने लगी। चट्टान के नीचे दबने से तांत्रिक की मौत हो गई। लेकिन मृत्यु से पहले उसने श्राप दिया कि किला और आसपास की बस्तियां उजड़ जाएं, यहां का विनाश हो जाए। इस श्राप के प्रभाव में किला वीरान हो गया। यहां पर रात में आत्माओं का राज हो गया और यह डर का दूसरा नाम हो गया। यह किला डर का दूसरा नाम है। यही कारण है कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद इस किले में प्रवेश प्रतिबंधित है।

स्थानीय लोगों ने महसूस किए भूत

स्थानीय लोगों से बात करने के बाद भानगढ़ के किले में भूतिया गतिविधियों की बात को और बल मिलता है। यहां कई लोगों ने भुतिया गतिविधियां महसूस की हैं। उनकी जुबानी सुनकर भानगढ़ का एक-एक पत्थर भूतिया महसूस होता है। कहते हैं कि देर रात किले के अंदर उसी तरह का बाजार सज जाता है, जैसा तांत्रिक के समय था। लोगों का कहना है कि यहां से चीखने, चिल्लाने की आवाजें आती हैं और जो भी व्यक्ति रात में किले के अंदर होता है, उसकी मृत्यु निश्चित है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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