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RG Kar Case: जूनियर डॉक्टर से दुष्कर्म-हत्या मामले में CBI की रिपोर्ट पेश, 20 नवंबर को अगली सुनवाई

सीबीआई ने आरजी कर दुष्कर्म-हत्या साजिश मामले की जांच रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर तय की है।

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कोलकाता हाईकोर्ट (फोटो-Twitter)

RG Kar Case: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अगस्त 2024 में पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एक महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या की कथित साजिश की जांच पर कलकत्ता उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि बंद कमरे में की जा रही इस मामले की सुनवाई में अब 20 नवंबर को फिर से दलीलें सुनी जाएंगी। केंद्रीय एजेंसी ने पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के निर्देश के अनुसार रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की। खंडपीठ ने 28 अगस्त को सीबीआई को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या

रिपोर्ट में यह बताने को कहा गया था कि अस्पताल में चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या की कथित साजिश की जांच के दौरान एजेंसी किन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कितने लोगों की संलिप्तता तक पहुंची। अदालत ने 21 मई को सीबीआई के पूर्वी क्षेत्र के संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया था।

राज्य सरकार द्वारा संचालित इस अस्पताल में नौ अगस्त 2024 की रात महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। इस मामले में संजय रॉय को यहां सियालदह सत्र अदालत ने दोषी ठहराया था और उसे जीवनभर कारावास की सजा सुनाई थी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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