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Jammu Kashmir: सब्सिडी में यात्रा कराएगा हेलीकॉप्टर, जल्द मौज से करिए सफर

जम्मू-कश्मीर में सब्सिडी वाली हेलीकॉप्टर सेवा का सफलतापूर्वक ट्रायल सफर रहा। यह सेवा सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को हवाई परिवहन की सुविधा मिलेगी।

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(फोटो साभार)

Photo : Twitter

जम्मू-कश्मीर: पुंछ जिले के मेंढर क्षेत्र में सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली सब्सिडी वाली हेलीकॉप्टर सेवा का गुरुवार को सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया। यह ट्रायल ओपी हिल स्टेडियम और चिल्ड्रन पार्क लोकेशन पर आयोजित किया गया, जिसमें मेंढर के एसडीएम इमरान रशीद, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। मेंढर के एसडीएम इमरान रशीद ने बताया कि इस हेलीकॉप्टर सेवा को जल्द ही आम जनता और आपातकालीन स्थितियों में उपयोग के लिए शुरू किया जाएगा। यह सेवा सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को हवाई परिवहन की सुविधा मिलेगी।

सब्सिडीयुक्त हेलीकॉप्टर सेवा को मंजूरी

उन्होंने आगे बताया कि ट्रायल के दौरान आई टीम ने हेलीपैड और अन्य तकनीकी आवश्यकताओं का निरीक्षण किया। टीम ने कुछ सुधारों की जरूरत जताई, जिन्हें जल्द ही पूरा किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने से क्षेत्र में विकास के नए अवसर खुलेंगे। लोगों की परिवहन संबंधी समस्याओं का समाधान होगा। बता दें कि पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू- पुंछ- मेंढर के साथ जम्मू- मेंढर-जम्मू के लिए सब्सिडीयुक्त हेलीकॉप्टर सेवा को मंजूरी दी थी। यह जानकारी नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव मोहम्मद एजाज असद ने दी थी।

गृह मंत्रालय से प्राप्त सूचना का हवाला देते हुए उन्होंने बताया था कि मंत्रालय ने जम्मू-पुंछ-मेंढर के नए मार्ग पर सब्सिडीयुक्त हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें जम्मू-मेंढर-जम्मू का अतिरिक्त विकल्प भी शामिल है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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