2027 विधानसभा चुनाव लोकतंत्र की परीक्षा, साजिश का चक्रव्यूह रचेगी BJP; SIR-जाति जनगणना पर क्या बोले अखिलेश?
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Jan 24, 2026, 03:12 PM IST
अखिलेश ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि इन्होंने BLO की ट्रेनिंग कैसी कराई थी? कई BLO की जान चली गई। चुनाव आयोग क्या कर रहा है? भाजपा के शासन में जनता के प्रति कोई ईमानदारी नहीं है, भाजपा सरकार पिछड़ा, दलित मुसलमान समुदाय को अपमानित और उनसे नफरत करती है। यही पीडीए भाजपा को परास्त करेगा।
(सपा प्रमुख अखिलेश यादव - @yadavakhilesh)
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम न होने और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना न करना पीडीए (पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ भाजपाई साजिश है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या? जातिगत जनगणना भी भाजपा का जुमला है। अखिलेश ने कहा कि हमसे कहा गया था कि SIR के बाद मतदाता सूची में कोई कसर नहीं छूटेगी, लेकिन उपचुनाव में वोटों की लूट की गई। चुनाव आयोग ने कहा था कि CCTV फुटेज किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी जाएगी, लेकिन उसका क्या हुआ। SIR रिवीजन के माध्यम से भी कई किस्म की साजिश की जा रही है। इस दौरान अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होना है और ये लोकतंत्र के लिए अग्नि परीक्षा है।
अखिलेश ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि इन्होंने BLO की ट्रेनिंग कैसी कराई थी? कई BLO की जान चली गई। चुनाव आयोग क्या कर रहा है? एक ही नाम से दो-दो वोट बन रहे हैं। मेरी मांग है कि चुनाव आयोग हमारा सहयोग करे।
2027 में साजिश रचेगी भाजपा
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव लोकतंत्र के लिए अग्नि परीक्षा है और भाजपा इसके लिए साजिश रचेगी। यादव से शुक्रवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये उलेमाओं व प्रमुख लोगों ने मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर वार्ता की। पार्टी द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, भाजपा साल 2027 के विधानसभा चुनाव में साजिश रचेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के शासन में जनता के प्रति कोई ईमानदारी नहीं है, भाजपा सरकार पिछड़ा, दलित मुसलमान समुदाय को अपमानित और उनसे नफरत करती है। यही पीडीए भाजपा को परास्त करेगा। इस सरकार का अहंकार चरम पर है और बस समय आ गया है कि अहंकारियों का अस्तित्व नहीं बचेगा। भाजपा ने उत्तर प्रदेश को बर्बाद कर दिया है, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है, चारो तरफ अराजकता है और इस नुकसान की भरपाई में बरसों लग जाएंगे।
सपा प्रमुख ने आह्वान किया कि बुरे लोगों को हटाने के लिए अच्छे लोग एक साथ आ जाएं और नकारात्मक लोगों को हटाने के लिए सकारात्मक लोग एकजुट हो जाए। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है, गरीब और गरीब होता जा रहा है, संपत्ति का केंद्रीयकरण हो गया है, कुछ पूंजी घरानों की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि हुई है जबकि आम जनता की आय नहीं बढ़ रही है।
यादव ने जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम न होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना न करना पीडीए (पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ भाजपाई साजिश है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या? जातिगत जनगणना भी भाजपा का जुमला है।
भाजपा का क्या है सीधा फार्मूला
सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का सीधा फार्मूला है-न गिनती होगी, न आनुपातिक आरक्षण-अधिकार देने का जनसांख्यिकीय आधार बनेगा। उन्होंने आगे लिखा कि आज भाजपा पर भरोसा करनेवाले अपने को ठगा हुआ ही नहीं, बल्कि घोर अपमानित भी महसूस कर रहे हैं। भाजपा में जो कार्यकर्ता व नेता अब तक जातिगत जनगणना करवाने का दावा कर रहे थे, वो अब अपने समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे। वो अब गले से भाजपाई पट्टा और घरों, दुकानों, वाहनों से भाजपा का झंडा उतारने के लिए मजबूर हैं।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लिखा कि पीडीए को अपने मान-सम्मान, आरक्षण और अधिकार की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि अब जब विरोध होगा तो ‘छलजीवी भाजपा’ फिर कहेगी कि ये टाइपिंग मिस्टेक हो गई। भाजपा अब इतनी बुरी तरह एक्सपोज हो गई है कि सबको मालूम है कि वह अपने गलत मंसूबों के भंडाफोड़ के बाद आगे क्या करेगी।
भाजपाई चालाक नहीं, बेशर्म हैं-अखिलेश
दरअसल ये भाजपाई चालाक नहीं, बेशर्म हैं। सपा मुखिया ने लिखा कि अब शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी’ भाजपा का मतलब ‘धोखा’ लिख देना चाहिए। गौरतलब है कि जातीय जनगणना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल लगातार सरकार से सवाल उठाते रहे हैं। विशेष रूप से विपक्षी दलों के नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। विपक्ष का आरोप रहा है कि जातीय जनगणना के बिना सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस विषय पर स्पष्ट और ठोस पहल न किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती रही है।
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