Delhi News: दक्षिण दिल्ली में साकेत इलाके के सैदुल अजाब इलाके में बिल्डिंग गिरने (Saket Building Collapse) के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस की अहम टिप्पणी सामने आई है। एमिकस का कहना है कि MCD की लापरवाही के कारण बिल्डिंग गिरी, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी। ज्ञात हो कि सैदुल अजाब इलाके में अवैध रूप बनी पांच मंजिला इमारत के गिरने की घटना में 14 लोग घायल भी हुए थे। इसी मामले में हाईकोर्ट पर आरोप लगाते हुए वीडियो अपलोड करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इंफ्लएंसर कपिल कक्कड़ के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का नोटिस भी जारी किया है।
हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दिल्ली HC पर साकेत बिल्डिंग में गैर-कानूनी निर्माण जारी रखने के आरोप लगाने वाले वीडियो को हटाने और यूजर का हैंडल ब्लॉक करने का भी निर्देश दिया है। इस मामले में गूगल, यू ट्यूब और मेटा के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि अगर URL उनको शेयर किया जाएगा तो वो वीडियो हटा देंगे। ज्ञात हो कि 30 मई को दिल्ली के साकेत इलाके मे बिल्डिंग गिर गई थी, जिसमे 6 लोगों की मौत हुई और 14 घायल हो गए थे।
लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के कारण गिरी बिल्डिंग
इधर अवैध निर्माण से जुड़े देशव्यापी मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने MCD पर आरोप लगाया है। एमिकस क्यूरी का कहना है कि नगर निगम अधिकारियों की लंबे समय तक लापरवाही और बिल्डिंग कानूनों के उल्लंघन के कारण ही सैदुल अजाब में अवैध रूप से बनी पांच मंजिला बिल्डिंग गिरी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक स्टेटस रिपोर्ट में, एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि 30 मई को प्रॉपर्टी नंबर 261, वेस्टर्न मार्ग, सैदुल अजाब में हुई यह दुखद घटना सालों से बिना इजाजत निर्माण और MCD द्वारा कानून लागू करने में बार-बार नाकाम रहने का नतीजा थी।
तीन स्टेज में हुआ अवैध निर्माण
रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम के रिकॉर्ड बताते हैं कि साइट पर अवैध निर्माण तीन स्टेज में हुआ था। बिल्डिंग पर पहली बार 2012 में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर बिना मंजूरी के निर्माण का केस दर्ज किया गया था। 2015 में, कॉर्पोरेशन ने फिर से दूसरी और तीसरी मंजिल पर बिना इजाजत कंस्ट्रक्शन का केस दर्ज किया। इसके बाद, हाल के महीनों में कथित तौर पर चौथी और पांचवीं मंजिल को गैर-कानूनी तरीके से जोड़ा गया, जिसके बाद आखिरकार बिल्डिंग गिर गई।
एमिकस ने कहा कि 2015 में उल्लंघन का केस दर्ज करने के बावजूद, कॉर्पोरेशन प्रॉपर्टी मालिक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा। एमिकस ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने न तो जगह को सील किया और न ही जब और मंजिलें बनाई जा रही थीं, उस समय जरूरी कदम उठाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंस्ट्रक्शन ने दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट और यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज के नियमों का उल्लंघन किया गया।
बिल्डिंग का मालिक गया हाईकोर्ट
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि यह मामला कई बार दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा था। दिसंबर 2020 में, बिल्डिंग के मालिक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि बिना नोटिस के बिल्डिंग गिराने पर विचार किया जा रहा है। उस समय कोर्ट ने साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कोई भी कार्रवाई करने से पहले मालिक का पक्ष सुनने का निर्देश दिया था।
इसके बाद हाई कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई, जिसमें प्रॉपर्टी पर कथित गैर-कानूनी निर्माण को हाईलाइट किया गया और निगम अधिकारियों पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया। कॉर्पोरेशन ने हाई कोर्ट को बताया कि अगर कोई बिना इजाजत निर्माण पाया गया तो सही एक्शन लिया जाएगा।
MCD ने कोर्ट में झूठ कहा
एमिकस क्यूरी ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी जांच के बावजूद, गैर-कानूनी स्ट्रक्चर खड़ा रहा और बढ़ता रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से बिना इजाजत कंस्ट्रक्शन जारी नहीं रह सकता था, अगर बिल्डिंग रेगुलेशन लागू करने वाले अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन पर आंखें नहीं बंद की होतीं।
रिपोर्ट में सैदुल अजाब में बिना इजाजत निर्माण के बारे में अप्रैल 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट में फाइल की गई एक पिटीशन का भी जिक्र किया गया। एमिकस ने आरोप लगाया कि MCD की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट के सामने साफ-साफ कहा कि उस प्रॉपर्टी पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा था। रिपोर्ट ने इसे झूठा बयान बताया, और कहा कि इसकी वजह से उस पिटीशन को खारिज कर दिया गया, जिसमें चल रहे गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन के खिलाफ दखल देने की मांग की गई थी।
दिखाने के लिए दो लोगों को सस्पेंड किया गया
बिल्डिंग गिरने के बाद, MCD ने एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया। हालांकि, एमिकस ने इस एक्शन को बाद में की गई और दिखावटी एक्सरसाइज बताया। एमिकस ने कहा कि जवाबदेही रूटीन सस्पेंशन से आगे बढ़नी चाहिए।
एमिकस ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह MCD को यह बताने का निर्देश दे कि सालों तक गैर-कानूनी पांच मंजिला स्ट्रक्चर कैसे बना रहा, इन कमियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करें, पूरी दिल्ली में स्ट्रक्चरल ऑडिट करें, और सैदुल अजाब हादसे के बारे में डिटेल्ड एक्शन-टेकन रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखे।
