राँची

Ranchi Rain: रांची में बारिश से सड़कें बनी तालाब, जलभराव ने खोली नगर निगम की पोल

रांची में बारिश ने नगर निगम की पोल खोल कर रख दी है। टैक्स लेने में इनदिनों नगर निगम सबसे आगे है, लेकिन उसे शहर के हालात की तनिक भी चिंता नही है । रांची के शहर में बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात देखे गए।

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रांची में भारी बारिश

रांची : शहर में रविवार की शाम अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। जोरदार बारिश और वज्रपात से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। मुसलाधार बारिश से जहां एक ओर अचानक मौसम का मिजाज बदल गया, वहीं कई इलाकों में जलजमाव हो गया। रविवार को मौसम विभाग ने रांची समेत 10 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया था। इसमें गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड, दुमका, देवघर और जामताड़ा शामिल है। जहां स्थानीय लोग ट्रैक्टर का उपयोग कर अपने गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश करते नजर आए। कुछ लोग ट्रैक्टर पर सवार होकर पानी से भरे रास्ते से गुजरते हुए दिखाई दिए। इस दौरान पानी ट्रैक्टर के पहियों तक पहुंच गया है।

सड़कें जलमग्न

भारी बारिश से जलमग्न सड़कों पर बाइक को खींचते लोग दिखे। रांची में भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं, जहां लोग अपनी बाइक को पानी से भरे रास्ते से खींचते हुए नजर आए। पानी उनके घुटनों तक पहुंच गया है, ऐसा लग रहा है जैसे रांची में नगर निगम जैसी कोई चीज नहीं है ।

रांची के कई घरों में तो हालात और भी भयावह नजर आए। कई स्थानों पर तो लोगों का पूरा बेड तक डूब गया। टेबल कुर्सी तक पानी में डूबे नजर आए। मेज पर रखे टीवी तक पानी भर गया। नालों की साफ सफाई नहीं और इसके अंदर कचरा जमा होने से कई स्थानों पर तो गंदा पानी सड़कों पर बहता नजर आया। दो दिन पहले भी लगातार चार दिन तक हुई बारिश में रांचीवासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। एक दिन राहत मिलने के बाद फिर से इंद्रदेव कहर बनकर बरसें हैं।

मॉनसून के शुरुआती दौर की बारिश में रांची पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है। इस अव्यवस्था का बड़ा कारण नगर निगम की ओर से समय रहते साफ सफाई नहीं करने और नालों को जैसे-तैसे छोड़ देना ही बड़ा कारण माना जा रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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