Ranchi News: घर-घर अखबार बांटने वाला एक युवक अपनी मेहनत और जुनून के बल पर सिंगापुर में एक बड़ी रेस्तरां चेन संचालित कर रहा है। इनके खुद के चार रेस्तरां हैं। इनमें 250 लोग काम करते हैं। कभी हजारीबाग की गलियों में यह अखबार बांटकर महीने में 800-900 रुपए ही कमा पाते थे। महज 17 साल की उम्र में चंद्रदेव कुमार शर्मा अपना घर और परिवार छोड़कर चेन्नई पहुंच गए। यहां रेस्तरां में वेटर का काम किया। फिर रेस्तरां मैनेजर बने और सिंगापुर पहुंच गए।
चार रेस्तरां चला रहे चंद्रदेव शर्मा का लक्ष्य 100 रेस्तरां खोलने का है। इस योजना पर वह कुछ साल से काम भी कर रहे हैं। उनके इस संघर्ष का सफर 15 साल का है। शर्मा का मानना है कि सच्ची लगन ही उनकी सफलता का आधार है। वह हमेशा से कुछ बड़ा करना चाहते थे।
गांव एवं उसके आसपास थी नक्सलियों की दहशत
चंद्रदेव का कहना है कि उनके गांव एवं आसपास के इलाकों में नक्सलियों की दहशत थी। उनका भी सिक्का चलता था। वह इस इलाके की खबरें एवं सूचनाएं हजारीबाग जिला मुख्यालय से निकलने वाले अखबार को दिया करते थे। ऐसे में उनके क्षेत्र के लोग उन्हें रिपोर्टर के तौर पर जानने लगे थे। इससे नक्सली संगठन का एरिया कमांडर नाराज हो गया। उन्हें बड़ी-बड़ी धमकियां मिलने लगी। 2004 में घर छोड़ते समय पिता ने 1500 रुपए दिए थे।
वेटर की नौकरी में मिलते थे 700 रुपए
उन्होंने बताया कि घर छोड़कर वह मुंबई पहुंच गए। यहां उन्हें 700 महीने के वेतन पर वेटर की नौकरी मिली। इसके बाद वह चेन्नई चले गए, जहां ओरिएंटल कुजिन प्राइवेट लिमिटेड के एक बड़े रेस्तरां में वेटर का काम किया। डेढ़ साल बाद उनके काम से खुश होकर उन्हें रेस्तरां के डायरेक्टर महादेवन ने सिंगारपुर में एक शख्स के साथ मिलकर रेस्तरां खोलने की योजना बताई।
30 हजार रुपए वेतन पर भेजा गया था सिंगापुर
चेन्नई के रेस्तरां के डायरेक्टर ने उन्हें कुछ लोगों के साथ 30 हजार महीने के वेतन सिंगापुर भेज दिया। वहां रेस्तरां में उन्हें मैनेजर बना दिया गया। फिर उन्हें पार्टनरशिप में रेस्तरां खोलने का ऑफर मिल गया। चंद्रदेव ने वेतन से बचाकर 3 लाख जमा कर रखे थे। रेस्तरां खोलने के लिए 50 लाख की जरूरत थी। पार्टनर ने उन्हें कम से कम 6 लाख का इंतजाम करने के लिए कहा। चंद्रदेव ने रकम का इंतजाम किया और उनका पहला रेस्तरां खुल गया। यह पहली कोशिश सफल रही। आज वे चार रेस्तरां चला रहे हैं।
