राँची

झारखंड ब्यूरोक्रेसी में खलबली, अचानक हटाए गए DGP अजय कुमार सिंह; इस ऑफिसर को मिला प्रभार

झारखंड के डीजीपी अजय कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर उनकी जगह अनुराग गुप्ता को इस पद का प्रभार सौंपा गया है। इस फैसले के बाद झारखंड ब्यूरोक्रेसी में खलबली मची हुई है।

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Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

रांची: झारखंड ब्यूरोक्रेसी में शुक्रवार को अचानक हलचल मच गई। दरअसल, राज्य के डीजीपी अजय कुमार सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। फिलहाल, उनकी जगह अनुराग गुप्ता को इस पद का प्रभार सौंपा गया है। राज्य सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। डीजीपी के पद पर तैनात रहे 1989 बैच के आईपीएस अजय कुमार सिंह को झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड का अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पद पर भेजा गया है। उनकी जगह डीजीपी का प्रभार 1990 बैच के आईपीएस और सीआईडी एवं एसीबी के डीजी के रूप में पोस्टेड अनुराग गुप्ता को सौंपा गया है।

ब्यूरोक्रेसी के गलियारे में तरह-तरह की चर्चा

अधिसूचना के अनुसार, झारखंड पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड में अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के रूप में पदस्थापित 1992 बैच के आईपीएस प्रशांत कुमार सिंह को संचार एवं तकनीकी शाखा में डीजी के रूप में पदस्थापित किया गया है। अजय कुमार सिंह को वरीयता के आधार पर 14 फरवरी 2023 को झारखंड का डीजीपी बनाया गया था। उन्हें अचानक इस पद से हटाए जाने से ब्यूरोक्रेसी के गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है।

कौन हैं आईपीएस अनुराग गुप्ता

प्रभारी डीजीपी बनाए गए अनुराग गुप्ता झारखंड पुलिस में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वह गढ़वा और हजारीबाग के एसपी, रांची के एसएसपी और बोकारो रेंज के डीआईजी के पद पर लंबे समय तक काम कर चुके हैं। पूर्व में वह झारखंड पुलिस मुख्यालय में वह एडीजी स्पेशल ब्रांच के पद पर पदस्थापित रहे हैं।

(इनपुट-आईएनएस)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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