राँची

Gaya Tilkut: मकर सक्रांति पर अब रांची में ही लीजिए गया के तिलकुट का मजा, इस बाजार में है उपलब्ध

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Jan 13, 2023, 09:46 PM IST

Gaya Tilkut: बिहार के गया का तिलकुट पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। कई देशों में इसकी सप्लाई होती है। खासकर मकर सक्रांति के अवसर पर इसकी डिमांड काफी बढ़ जाती है। बिहार के लगभग सभी जिलों सहित पड़ोसियों राज्यों से भी इसकी डिमांड काफी रहती है। कहा जाता है कि गया के तिलकुट का स्वाद ही गजब का होता है।

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रांची में भी मिल रहा है गया का तिलकुट

Gaya Tilkut: गया का तिलकुट अब रांची में भी इस मकर सक्रांति पर उपलब्ध है। गया और नवादा के कारीगर गया के फेमस तिलकुट को रांची में ही बना रहे हैं। अब गया से तिलकुट लाने के बजाय, रांचीवासी अपने ही मार्केट से फेमस तिलकुट खरीद सकेंगे।

गया के तिलकुट का स्वाद ही अलग

बिहार और झारखंड में ऐसे तो तिलकुट लगभग हर जगह बनता है। मकर सक्रांति के अवसर पर चुड़ा-दही के साथ इसे खाया जाता है। ऐसे तो यह पूरे ठंड में उपलब्ध रहता है। हर जगह पर बनने वाले तिलकुट में वो स्वाद नहीं होता जो गया के रमना बाजार के तिलकुट का होता है। रमना बाजार के तिलकुट का स्वाद ही अलग होता है। मुंह में जाते ही यह घुल जाता है। अक्सर मकर सक्रांति पर इसे गया से लोग मंगवाते हैं, लेकिन अब गया के कारीगर ही विभिन्न शहरों में जाकर तिलकुट बनाने लगे हैं, जिससे लोगों को तिलकुट का स्वाद भीगया वाला मिल जाता है और इसकी ताजगी भी बनी रहती है।

रांची में यहां उपलब्ध

मकर सक्रांति पर रांची में तिलकुट की काफी डिमांड रहती है, कई व्यापारी हर साल गया से तिलकुट लाकर यहां बेचते हैं, लेकिन इसमें घपले की भी गुंजाइश रहती है। लेकिन अब रांची के हरमू बाजार में गया के ही कारीगर तिलकुट बना रहे हैं। जहां से आप ताजा तिलकुट खरीद सकते हैं। वो भी गया के स्वाद वाला।

कैसे बनता है तिलकुट

तिलकुट बनाने के लिए सफेद तिल, चीनी या फिर गुड़ की जरूरत होती है। तिल को रोस्ट करके चीनी के साथ मिला लिया जाता है। फिर इसे मूसल से काफी समय तक कूटा जाता है।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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