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Ram Mandir: चंपत राय के इस्तीफे पर ट्रस्ट में घमासान, कई संत खुले समर्थन में; इस्तीफा प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर गहरे मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कई ट्रस्टियों और संतों ने उन्हें निर्दोष बताते हुए इस्तीफा स्वीकार किए जाने पर सवाल उठाए, जबकि पूरी प्रक्रिया की वैधता पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं। अब इस विवाद के अदालत तक पहुंचने की संभावना के बीच ट्रस्ट की अगली बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (फाइल फोटो- ANI)

Photo : ANI

Ram Mandir: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के अंदर गहरे मतभेद सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान अधिकांश ट्रस्टी चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के पक्ष में नहीं थे। कई संतों और ट्रस्ट सदस्यों ने उन्हें पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उनके समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी। बैठक के दौरान भावुक क्षण भी आए और इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर गंभीर कानूनी और प्रक्रियागत सवाल भी उठाए गए।

चंपत राय के इस्तीफे पर हुई ज्यादा चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में सबसे अधिक चर्चा चंपत राय के इस्तीफे पर हुई। कई ट्रस्टियों का मत था कि जब तक चढ़ावा चोरी मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी व्यक्ति को नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। बैठक में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने चंपत राय के इस्तीफे का सबसे मुखर विरोध किया। वहीं स्वामी परमानंद और स्वामी दिनेंद्र दास ने भी कहा कि चंपत राय पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें पद छोड़ने की आवश्यकता नहीं थी।

गोविंद देव गिरि हो गए भावुक

बैठक के दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि प्रस्ताव पढ़ते समय भावुक हो गए। सूत्रों के अनुसार, बहस बढ़ने पर वरिष्ठ विधिवेत्ता के. परासरण ने हस्तक्षेप कर ट्रस्ट के नियमों का हवाला देते हुए आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की और माहौल को शांत कराया। बैठक के बाद महंत गोविंद देव गिरि ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि चंपत राय चारित्रिक रूप से अत्यंत शुद्ध व्यक्ति हैं और विवाद उनके कार्य करने की शैली के कारण उत्पन्न हुआ।

इस्तीफे की प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल

इसी बीच इस्तीफे की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नियमों के अनुसार इस्तीफा स्वीकार करने से पहले एक महीने के नोटिस का प्रावधान है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा बैठक की सूचना, प्रेस विज्ञप्ति और संबंधित दस्तावेजों के बिना हस्ताक्षर जारी किए जाने तथा चंपत राय के त्यागपत्र की प्रति उपलब्ध नहीं होने का भी दावा किया जा रहा है।

अदालत में चुनौती देने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के समर्थक और कुछ ट्रस्टी अब इस्तीफा स्वीकार करने की पूरी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। बैठक में कई संतों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि चढ़ावा चोरी मामले में किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आई है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल चंपत राय पर कैसे तय की जा सकती है। उनका कहना था कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

ट्रस्ट की अगली बैठक पर सबकी नजर

ट्रस्ट के अंदर सामने आए इन मतभेदों ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर कई संत और ट्रस्टी चंपत राय के समर्थन में खड़े हैं, वहीं दूसरी ओर इस्तीफा स्वीकार करने की प्रक्रिया पर भी कानूनी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब सबकी नजर ट्रस्ट की अगली बैठक और संभावित न्यायिक चुनौती पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह मामला धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन सकता है।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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