Rajkot: 12 दिन में चार्जशीट, 41वें दिन फांसी; 7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को सजा-ए-मौत
- Authored by: Nilesh Dwivedi
- Updated Jan 17, 2026, 07:39 PM IST
राजकोट में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को रिकॉर्ड समय में फांसी की सजा सुनाई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, ठोस सबूत और परिवार की न्याय की मांग ने इस केस को प्राथमिकता दिलाई। महज 41 दिनों में पूरा ट्रायल पूरा कर अदालत ने कठोर फैसला सुनाकर समाज को सख्त संदेश दिया।
राजकोट कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को मौत की सजा सुनाई (सांकेतिक फोटो)
Rajkot News: राजकोट में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला पुलिस की त्वरित कार्रवाई और ठोस सबूतों के आधार पर केवल 41 दिनों में सुनाया गया। राजकोट ग्रामीण एसपी विजयसिंह गुर्जर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम और जांच की जानकारी साझा की। इस दौरान विशेष लोक अभियोजक एस.के. वोरा भी मौजूद रहे। एसपी गुर्जर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच महिला एएसपी सिमरन भारद्वाज को सौंपी गई थी।
घटना के 12 दिन बाद ही चार्जशीट दाखिल
पीड़िता के परिवार ने तुरंत न्याय की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने इस केस को प्राथमिकता देते हुए तेजी से जांच शुरू की। बच्ची के पिता ने जज, विशेष लोक अभियोजक और एसपी को पत्र लिखकर स्पीडी ट्रायल की अपील की थी। परिवार की मांग को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने अदालत से रोजाना सुनवाई करने का अनुरोध भी किया। पुलिस ने घटना के केवल 12 दिन बाद ही चार्जशीट दाखिल कर दी, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकी और रिकॉर्ड समय में फैसला सुनाया गया।
मामला कैसे हुआ और मजबूत?
जांच के दौरान बच्ची के साथ मौजूद अन्य बच्चों के बयान अदालत में दर्ज किए गए, जिन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के अंतर्गत लिया गया। घटनास्थल से आरोपी के बाल बरामद हुए, जो फोरेंसिक परीक्षण में महत्वपूर्ण सबूत साबित हुए। आइडेंटिफिकेशन परेड में बच्ची के साथ खेल रहे बच्चों ने आरोपी रामसिंह को पहचान लिया। इसके अतिरिक्त, बच्ची के परिजनों के बयान भी अदालत में प्रस्तुत किए गए। जांच से यह तथ्य सामने आया कि आरोपी पहले भी इसी तरह का अपराध करने की कोशिश कर चुका था, जिससे उसके खिलाफ मामला और अधिक मजबूत हो गया।
घटना के 41वें दिन आरोपी को मौत की सजा
कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए घटना के 41वें दिन आरोपी को मौत की सजा सुनाई। हालांकि, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एस.के. वोरा ने स्पष्ट किया कि इस सजा को लागू करने के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी आवश्यक होगी। इसके अलावा, प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का अधिकार भी मिलेगा। गौरतलब है कि करीब पांच साल पहले रमेश देदुकिया नामक आरोपी को तीन साल की बच्ची की हत्या और बलात्कार के मामले में फांसी की सजा दी गई थी, लेकिन अब तक हाई कोर्ट ने उस सजा पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
पहचान प्रक्रिया की सराहना
इस मामले में त्वरित जांच और कठोर कदम उठाकर समाज को यह संदेश दिया गया कि बच्चों के खिलाफ अपराध किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। आइडेंटिफिकेशन परेड के दौरान प्रत्येक संदिग्ध को एक खिलौना दिया गया। उसी खिलौने के आधार पर पीड़ित बच्ची और उसके साथ मौजूद अन्य बच्चों ने आरोपी की पहचान की। अदालत ने भी इस तरह की पहचान प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे प्रभावी माना।
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