रायपुर

छत्तीसगढ़ के फूड इंस्पेक्टर पर लगा जुर्माना, 41 लाख लीटर पानी के बदले देने होंगे 53 हजार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 30, 2023, 08:07 PM IST

Chhattisgarh Food Inspector News: जल संसाधन विभाग की ओर से फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास को नोटिस भी जारी किया गया है। उन्हें इस नुकसान की भरपाई के लिए 53 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। विभाग ने जुर्माना भरने के लिए दस दिन का समय दिया है।

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छत्तीसगढ़ के फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास पर लगा जुर्माना

Photo : Twitter

Chhattisgarh Food Inspector News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक फोन के लिए 41 लाख लीटर पानी बर्बाद करने वाले फूड इंस्पेक्टर पर जुर्माना लगाया गया है। जल संसाधन विभाग की ओर से फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास को नोटिस भी जारी किया गया है। उन्हें इस नुकसान की भरपाई के लिए 53 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। बता दें, कांकेर जिले में एक जलाशय में फोन गिरने के बाद उसे ढूंढने के लिए राजेश विश्वास ने 41 लाख लीटर पानी डैम से बहा दिया था। मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने राजेश विश्वास को निलंबित कर दिया था।

इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक अनुमंडल पदाधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है, जिन्होंने जलाशय से पानी निकालने के लिए मौखिल अनुमति दी थी। नोटिस में कहा गया है कि जलाशय से निकाले के गए पानी की कीमत उनके वेतन से क्यों नहीं वसूली जाए? वहीं, जल संसाधन विभाग ने फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास को जुर्माना भरने के लिए दस दिन का समय दिया है।

एसडीओ से तीन दिन के अंदर मांगा गया जवाब

जल संसाधन विभाग ने एसडीओ आरसी धीवर को नोटिस जारी किया गया है। इसमें फूड इंस्पेक्टर को मौखिक अनुमति देने के कारण के बारे में पूछा गया है। नोटिस में कहा गया है कि तीन दिन के अंदर अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो 41 लाख लीटर पानी की बर्बादी की कीमत उनके वेतन से वसूल की जाएगी। बता दें, बीते दिनें फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास अपने दोस्तों के साथ परलकोट जलाशय गए थे। इसी दौरान उनको फोन जलाशय में गिर गया, जिसके बाद उन्होंने दो बड़े पंप लगाकर जलाशय का 41 लाख लीटर पानी बहा दिया।

मामला सामने के बाद हुई थी कार्रवाई

तीन दिन तक 24 घंटे पंप चलाकर लाखों लीटर पानी बहाए जाने का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया था। कलेक्टर की की ओर से राजेश विश्वास को निलंबित कर दिया गया था। उन्हें कांकेर जिला कार्यालय अटैच किया गया है।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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