रायपुर

छत्तीसगढ़ में खत्म होगी सिंचाई की समस्या, बिजली उत्पादन में क्रांति लाएगी बोधघाट बांध परियोजना; CM साय ने PM मोदी से की चर्चा

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, इसी वजह से संभाग सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है, संभाग में सिंचाई साधनों की समस्या को दूर करने और चहुमुखी विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना पर काम कर रही है।

Image

सीएम विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़)

Photo : Twitter

रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर राज्य में बोधघाट सिंचाई परियोजना सहित दो प्रमुख प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर चर्चा की और इसके लिए केंद्र से मंजूरी मांगी। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह इन परियोजनाओं पर विचार करेंगे। बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नयी दिल्ली में मैंने मुलाकात कर बोधघाट सिंचाई परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के संबंध में विस्तार से चर्चा की और उन्हें बताया कि बस्तर संभाग के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से इन परियोजनाओं की स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण है। बाद में मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, कि मैंने प्रधानमंत्री जी को बताया कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा है और इसलिए सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए यहां बहुत काम नहीं हो पाया है। बस्तर में कुल बोये गए क्षेत्र 8.15 लाख हेक्टेयर में से केवल 1.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई सुविधाएं विकसित हो पायी हैं।

इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना कृषि क्षेत्र के लिए वरदान!

साय ने कहा कि अब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में बस्तर में तेजी से नक्सलवाद की समस्या का उन्मूलन हो रहा है और बस्तर शांति तथा विकास की ओर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना पूरे बस्तर में कृषि विकास और रोजगार को बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाएं बस्तर को सक्षम, विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होंगी। दोनों परियोजनाओं की कुल लागत 49 हजार करोड़ रुपये है। प्रस्तावित बोधघाट सिंचाई परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के 269 गांव लाभान्वित होंगे, इससे खरीफ और रबी सीजन में 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। 125 मेगावाट बिजली उत्पादन के अलावा, इससे 49 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, अतिरिक्त रोजगार सृजित होंगे तथा प्रतिवर्ष 4,824 मीट्रिक टन मछली उत्पादन में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, ''इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के माध्यम से इंद्रावती नदी से लगभग 100 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फुट) पानी महानदी बेसिन में स्थानांतरित करने की योजना है। इससे तीन लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो सकेगी, जिसमें कांकेर जिले में 50,000 हेक्टेयर भूमि शामिल है। बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में क्रियान्वित किया जाना प्रस्तावित है।

सीएम साय ने बताया कि प्रधानमंत्री जी ने इसे गंभीरता से सुना और इस पर विचार करने की बात कही है। इससे हमारा यह विश्वास प्रबल हुआ है कि बस्तर के सर्वांगीण विकास का हमारा उद्देश्य सफल होगा। बस्तर में विकास, प्रगति और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा।' छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित बस्तर क्षेत्र में सात जिले बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा शामिल हैं। बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के तहत दंतेवाड़ा जिले के बारसूर गांव के पास इंद्रावती नदी पर बांध बनाने का प्रस्ताव है।

Read the Raipur Latest News in Hindi, Raipur Local News in Hindi, Raipur Breaking News and Updates, Raipur News Headlines, Raipur Hindi News Paper & रायपुर (न्यूज़) समाचार @ Times Now Navbharat

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article