रायपुर

छत्तीसगढ़ में शांति की नई सुबह; बीजापुर में 51 माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, सुरक्षाबलों के सामने किया आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों का आत्मसमर्पण लगातार जारी है, जिससे राज्य में शांति और विकास की दिशा में नई उम्मीद जगी है। बुधवार को 51 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। सरकार की पुनर्वास नीतियों और संवाद आधारित प्रयासों का यह परिणाम है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

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बीजापुर में 51 नक्सलियों ने किया सरेंडर (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)

Naxalite Surrender in Bijapur: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार को 51 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति तथा शांति, संवाद और विकास को बढ़ावा देने के सतत प्रयासों के फलस्वरूप ये सभी माओवादी समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं। जानकारी के अनुसार, ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले 51 माओवादियों में 9 महिलाएं और 42 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 और कंपनी नंबर-1, 2 और 5 के पांच सदस्य, एक एरिया कमेटी सदस्य (ACM), सात प्लाटून और एरिया कमेटी पार्टी सदस्य, तीन एलओएस सदस्य, एक मिलिशिया प्लाटून कमांडर, और 14 मिलिशिया प्लाटून सदस्य शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

माड़ संभाग की कंपनी के कई सक्रिय सदस्य

अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने हिंसा और जनविरोधी विचारधारा को छोड़कर अब शांति और विकास की राह अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि बुधवार को आत्मसमर्पण करने वालों में माड़ संभाग की कंपनी के कई सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इनमें कंपनी नंबर एक के सदस्य बुधराम पोटाम उर्फ रंजीत (25), बटालियन नंबर एक की पार्टी सदस्य मनकी कोवासी (24), कंपनी नंबर दो की सदस्य हुंगी सोढ़ी (27), उसी कंपनी के सदस्य रवीन्द्र पुनेम उर्फ आयतू (25) और पीएलजीए सदस्य देवे करटाम (25) के सिर पर प्रत्येक पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी मंगू ओयाम उर्फ लालू (27) पर पांच लाख रुपये का इनाम था।

986 माओवादियों को किया गया गिरफ्तार

अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में सात माओवादियों पर दो-दो लाख रुपये और सात अन्य पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक बीजापुर जिले में 461 माओवादी हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसी अवधि में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 138 माओवादी मारे गए, जबकि 485 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने आगे बताया कि वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में कुल 650 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, वहीं सुरक्षाबलों के साथ हुई विभिन्न मुठभेड़ों में 196 माओवादी मारे गए और 986 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया।

समाज में पुनर्समावेशन की प्रक्रिया वर्तमान में जारी

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 51 माओवादियों के पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। सभी नक्सलियों ने भारतीय संविधान में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार की ओर से मुख्यधारा में लौटे प्रत्येक व्यक्ति को पुनर्वास प्रोत्साहन के तहत 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी पुनर्वास प्रक्रिया में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स, विशेष कार्य बल (STF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह संयुक्त प्रयास राज्य में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील

बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन व्यतीत करें और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। डॉ. यादव ने माओवादियों से अपील की कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागकर निडर होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की स्थापना हो सके। उन्होंने कहा कि ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना के तहत 51 माओवादियों का आत्मसमर्पण बीजापुर जिले में बदलते सामाजिक माहौल और जनविश्वास का प्रतीक है। यह इस बात का प्रमाण है कि संवाद, पुनर्वास और विकास ही दीर्घकालिक शांति का वास्तविक मार्ग हैं।

नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज

छत्तीसगढ़ में हाल के महीनों में बड़ी संख्या में नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेजी से जारी है। अधिकारियों के अनुसार, बीते रविवार को कांकेर जिले में 21 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जबकि 17 अक्टूबर को जगदलपुर में 210 नक्सलियों ने 153 हथियारों के साथ सरेंडर किया। इसके अलावा, 2 अक्टूबर को बस्तर के बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें से 49 पर कुल 1.06 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने हाल ही में अपने बस्तर दौरे के दौरान नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की थी।

(इनपुट - भाषा)

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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