Punjab News: पंजाब के सरकारी स्कूलों में आज हुई पैरेंट्स-टीचर मीटिंग यानी PTM को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी स्कूलों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है। विवाद की वजह पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी SCERT की तरफ से स्कूलों को जारी किए गए निर्देश हैं। इन निर्देशों में बच्चों की माताओं से पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री मांवां धियां सत्कार योजना' को लेकर सवाल पूछने और उनके वीडियो बनाने की बात कही गई थी। इसके बाद अब विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
दरअसल, पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने गुरुवार को सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर आज पैरेंट्स-टीचर मीटिंग करवाने के लिए कहा था। इन निर्देशों में PTM के दौरान बच्चों की माताओं से मुख्यमंत्री मांवां धियां सत्कार योजना को लेकर उनकी राय पूछने के लिए भी कहा गया था। साथ ही, यह जानने के निर्देश दिए गए थे कि इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता का इस्तेमाल वे किस तरह करती हैं। निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों को माताओं के वीडियो बयान रिकॉर्ड करने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए भी कहा गया था। इसके अलावा, कम से कम 10 वीडियो स्कूलों के सोशल मीडिया पेज पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया था।
इन निर्देशों के बीच मोहाली के नया गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में अध्यापकों और अध्यापिकाओं को बच्चों की माताओं से योजना के बारे में बातचीत करते और उनके वीडियो बनाते हुए देखा गया। इसके साथ ही, स्कूल में अभिभावकों को पंजाब सरकार के चार साल की उपलब्धियों से जुड़े प्रचार सामग्री वाले इश्तहार भी बांटे जाते नजर आए। स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि सरकार की तरफ से योजना के बारे में जानकारी लेने और सवाल पूछने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत स्कूल में यह गतिविधि की जा रही है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने पंजाब सरकार पर सरकारी स्कूलों का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए करने का आरोप लगाया है। शिरोमणि अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार स्कूलों को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना रही है। कलेर के मुताबिक, सरकार की तरफ से विज्ञापनों पर किए जाने वाले खर्च को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब शिक्षकों को भी सरकार के प्रचार में लगाया जा रहा है, जबकि उनका मुख्य काम बच्चों को पढ़ाना है।
