पुणे

नीचे हाईवे, बीच में फ्लाईओवर और सबसे ऊपर मेट्रो...इस Metro ने कर दिखाया वह काम, जो बड़े-बड़े मुल्क न कर पाए!

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Dec 26, 2022, 12:27 PM IST

What is Nagpur Metro Double Decker Viaduct: यह प्रोजेक्ट सरल न होने के बावजूद इंजीनियर्स ने जमीन अधिग्रहित कर मेट्रो ट्रैक रेड किया और फिर कंस्ट्रक्शन के वक्त पूरी कॉस्ट (परियोजना की लागत) को कम कर दिया। यह समूचे भारत में इस तरह का इकलौता निर्माण है।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः प्रिंस डोगरा)

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

What is Nagpur Metro Double Decker Viaduct: महाराष्ट्र का नागपुर शहर यूं तो संतरों के लिए (सिटी ऑफ ऑरेंजेस) दुनिया भर में जाना जाता है, पर अब यह आर्किटेक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के अलहदा नमूने की वजह से अपनी अलग और नई पहचान बना चुका है। नागपुर मेट्रो ने वह कारनामा कर दिखाया है, जो दुनिया के बड़े-बड़े विकसित मुल्क नहीं कर पाए।

दरअसल, वहां पर डबल डेकर वायाडक्ट (Double Decker Viaduct) मेट्रो बनी है, जिसके तहत बेहद अनोखा नजारा देखने को मिलता है। नीचे आठ लेन वाला हाईवे, बीच में छह लेन वाला फ्लाईओवर और फिर सबसे ऊपर मेट्रो...जितना यह देखने में कठिन और करिश्माई लगता है, उतना ही इसे बनाकर यह साबित कर दिया गया कि भारत क्रिएटिविटी के मामले में बहुत कुछ कर सकता है।

3.14 किलोमीटर लंबे इस वायाडक्ट कंस्ट्रक्शन के तहत तीन मेट्रो स्टेशन आते हैं, जो कि छत्रपति नगर, जय प्रकाश नगर और उज्जवल नगर हैं। निर्माण में 2.7 किमी का हिस्सा चार लेने वाला है, जिसके तहत 500 मीटर का पार्ट छह लेन वाला है और नौ मीटर ऊंचाई वाला फ्लाईओवर है, जबकि मेट्रो ट्रैक 20 मीटर ऊंचा है।

रोचक बात है कि नागपुर मेट्रो के इस क्रिएटिव करिश्मे को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली। यही नहीं, इसे अशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है और फिर जाने-माने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शरीक किया गया। यह प्रोजेक्ट सरल न होने के बावजूद इंजीनियर्स ने जमीन अधिग्रहित कर मेट्रो ट्रैक रेड किया और फिर कंस्ट्रक्शन के वक्त पूरी कॉस्ट (परियोजना की लागत) को कम कर दिया। यह समूचे भारत में इस तरह का इकलौता निर्माण है।

चूंकि, यह कमाल का कंस्ट्रक्शन था, लिहाजा केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री ने इसकी जमकर तारीफ भी की। उन्होंने कहा था कि एनएचएआई को 20 प्रतिशत और नागपुर मेट्रो के कुल खर्चे में 20 प्रतिशत की सेविंग हुई। दोनों का योग मिला कर देखें तो इस तरह से कुल 40 फीसदी की रकम बचा ली गई।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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