प्रयागराज

अतीक का हिसाब आज: अपराध को बनाया परिवार का कारोबार, चार दशक से प्रयागराज के 'क्राइम किंग' का काला चिट्ठा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 28, 2023, 08:12 AM IST

अतीक अहमद को सोमवार शाम को नैनी जेल लाया गया था। साबरमती जेल से निकलने के बाद उसके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। प्रयागराज पहुंचने के बाद अतीक अहमद ने जेल के बैरक में बेचैनी में रात बिताई, वह बार-बार इधर से उधर टहलता रहा।

Image

अतीक अहमद की कोर्ट में पेशी आज

Photo : ANI

Atiq Ahmad News: माफिया से राजनेता बने अतीक अहमद के अपराधों का आज हिसाब होगा। करीब 17 साल पुराने उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में 11 बजे उसकी पेशी होगी। इस मामले में अदालत सजा का भी ऐलान कर सकती है। अतीक के खिलाफ यह पहला मामला होगा, जिसमें उसे सजा सुनाई जा सकती है, जबकि उस पर हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी जैसे 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

इससे पहले सोमवार को अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज की नैली सेंट्रल जेल लाया गया। अतीक को स्पेशल सेल में रखा गया है, जिसमें उसकी निगरानी के लिए 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उसके बैरक की निगरानी सीधे मुख्यालय से हो रही है। इसी जेल में अतीक के भाई अशरफ को भी रखा गया है। हालांकि, दोनों की बैरकें अलग- अलग हैं। दोनों से किसी को मिलने की इजाजत नहीं है। बता दें, अतीक का बेटा अली अहमद भी इसी जेल में बंद है।

बेचैनी में कटी अतीक की रात

प्रयागराज की नैनी जेल में माफिया अतीक की रात बेचैनी में कटी। वह बार-बार बैरक में टहलता रहा। जेल पहुंचते ही अतीक को सभी जरूरी चीजें जैसे- टूथपेस्ट, साबुन, टूथब्रश उपलब्ध कराया गया। उसे एक कंबल और चादर भी दिया गया। शाम को उसने खाने में दूध और ब्रेड लिया। इसके बाद करीब सुबह चार बजे उसने जेलकर्मियों से बाहर टहलने की गुजारिश की। अतीक ने कहा, उसे बहुत बेचैनी हो रही है और सरदर्द भी इसलिए थोड़ा खुली हवा में टहलना चाहता है। बता दें, नैनी जेल में अतीक को 10*15 स्क्वायर फीट की हाई सिक्युरिटी बैरक में रखा गया है। अतीक ने पहरे पर तैनात जेलकर्मी से देर रात पूछा कि क्या अशरफ आ गया है ।

अपराध को बनाया परिवार का कारोबार

अतीक अहमद करीब चार दशकों तक प्रयागराज का क्राइम किंग रहा। उसने अपराध को ही परिवार का कारोबार बनाया और धीरे-धीरे उसका पूरा परिवार इस कारोबार में उतरता चला गया। उसके अपराध की दुनिया की शुरुआत 1979 में हुई, जब अतीक पर पहली बार हत्या का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 6 नवंबर 1989 में अतीक अहमद पर उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी माफिया चांद बाबा की हत्या का आरोप लगा। यहीं से अतीक के क्राइम का ग्राफ बढ़ता ही गया। उसके आतंक का खौफ इतना था कि साल 2012 में 10 जजों ने भी अतीक के खिलाफ एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर दिया था।

अतीक को फांसी की सजा की मांग

दूसरी तरफ, पीड़ित उमेश पाल के परिवार ने अतीक के लिए फांसी की सजा की मांग की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उसे सड़क पर फांसी दी जानी चाहिए। अतीक को भी मौत का डर सताना चाहिए। बता दें, 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राजू पाल के रिश्तेदार उमेश पाल मुख्य गवाह थे। 2006 में उमेश पाल का भी अपहरण कर लिया गया। इस मामले में अतीक अहमद उसके भाई अशरफ समेत 11 लोग अरोपी थे। बता दें, बीते महीने फरवरी में उमेश पाल की भी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का आरोप भी अतीक अहमद पर है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!