प्रयागराज

महाकुंभ के बाद प्रयागराज के संगम क्षेत्र में अब कैसा है माहौल? जान लीजिए सुविधाओं से जुड़ा हर अपडेट

Prayagraj: महाकुंभ खत्म होने के बाद अब प्रयागराज के संगम क्षेत्र में कैसा माहौल है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का आना जारी है। कुछ सुविधाएं स्थायी रखने का निर्णय लिया गया है। महाकुंभ मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में मजदूर त्रिवेणी संगम क्षेत्र, अरैल घाट और झूंसी में फैले अस्थाई शहर को समेटने में लगे हुए दिखे।

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महाकुंभ। (फाइल फोटो)

Photo : iStock

Prayagraj's Sangam Area after Maha Kumbh: महाकुंभ मेला भले ही समाप्त हो गया हो और साधु सन्यासी यहां से प्रस्थान कर गए हों, लेकिन शाम को दूधिया रोशनी में नहाए संगम क्षेत्र का मनमोहक दृश्य अब भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई ऐसे लोग हैं जो भीड़ के कारण महाकुंभ में संगम स्नान के लिए नहीं आ सके थे, वो अब आ रहे हैं। दिल्ली की डॉक्टर दीक्षा इनमें से एक हैं। डॉक्टर दीक्षा ने बताया, 'महाकुंभ में भीड़ के बारे में सुनकर हम आने की हिम्मत नहीं जुटा सके। अब यहां आए हैं और संगम में डुबकी लगाई है। बहुत अच्छा लग रहा है। एक ही कमी है कि हम नागा साधु के दर्शन नहीं कर सके।' उन्होंने कहा कि सरकार ने संगम क्षेत्र के साथ ही प्रयागराज को बहुत खूबसूरती से सजाया संवारा है।

महाकुंभ मेला क्षेत्र में अब कैसा है माहौल?

प्रयागराज के कर्नलगंज मोहल्ले से संगम क्षेत्र घूमने आए नीरज केसरवानी का कहना है, 'हम लोग भीड़ के कारण महाकुंभ में नहीं आ सके, इसका हमें मलाल है, लेकिन अभी शाम का मौसम खुशगवार होने और संगम क्षेत्र में एलईडी लाइट लगी होने से यहां का नजारा किसी मेले से कम नहीं है।' महाकुंभ मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में मजदूर त्रिवेणी संगम क्षेत्र, अरैल घाट और झूंसी में फैले अस्थाई शहर को समेटने में लगे हुए दिखे।

संगम क्षेत्र में साल भर रहेंगी ये सुविधाएं

मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया, 'महाकुंभ में करोड़ों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को देखते हुए संगम क्षेत्र में कुछ सुविधाएं वर्ष पर्यंत जारी रखने का निर्णय किया गया है। इनमें ‘चकर्ड प्लेट्स’, लाइट, ‘चेंजिंग रूम’, घाटों की व्यवस्था साल भर रहेंगी।' उन्होंने बताया कि अगले एक पखवाड़े में सारे तंबू उखड़ जाएंगे और जहां तक पांटून पुलों का संबंध है, माघ मेला के लिए पांटून रिजर्व करके बाकी पांटून अन्य जिलों को भेज दिए जाएंगे।

मेलाधिकारी ने बताया कि क्या-क्या थीं व्यवस्था

पांटून पुलों के बारे में मेलाधिकारी ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में 30 पांटून (पीपा) पुल बनाए गए थे जिसमें 3,600 पांटून (पीपा) का उपयोग किया गया था। अधीक्षण अभियंता (महाकुंभ) मनोज गुप्ता ने बताया कि महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अद्भुत अनुभव उपलब्ध कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में आठ करोड़ रुपये की लागत से 485 डिजाइनर स्ट्रीट लाइट लगाई गई थीं।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, पूरे मेले क्षेत्र में 40 हजार से अधिक रिचार्जेबल लाइट्स (रिचार्जेबल बल्ब), लगभग 48,000 एलईडी लाइट स्थापित की गई थीं। उनके मुताबिक, मेला क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए 400 केवी के 85 सब स्टेशन, 250 केवी के 14 सब स्टेशन, और 100 केवी के 128 सब स्टेशन स्थापित किए गए थे।

रोडवेज ने 8,850 रोडवेज बसों का किया था संचालन

अधिकारियों के मुताबिक, 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बसे महाकुंभ नगर में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित महाकुंभ मेले में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई थी जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर कई राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष और विदेशी नागरिक शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस मेले के लिए रेलवे ने करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश कर 21 से अधिक फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण कराया और 16,000 से अधिक ट्रेनें चलाकर करीब पांच करोड़ यात्रियों को परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई थीं। वहीं, रोडवेज ने 8,850 रोडवेज बसों का संचालन किया था।

अधिकारियों ने बताया कि मेले में डेढ़ लाख से अधिक अस्थायी शौचालयों की साफ सफाई के लिए 15,000 से अधिक ‘स्वच्छता मित्रों’ और घाटों की सफाई के लिए लगभग 2000 गंगा ‘सेवा दूतों’ को लगाया गया था। उनके अनुसार, पूरे मेला क्षेत्र में वाहनों के सुगम आवागमन के लिए 651 किलोमीटर क्षेत्र में ‘चकर्ड प्लेटें’ बिछाई गई थीं। वहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड के जवान तैनात रहे। इसके अलावा, तीन जल पुलिस थाने, 18 जल पुलिस नियंत्रण कक्ष और 50 निगरानी टावर स्थापित किए गए थे। स्नान के लिए 12 किलोमीटर का घाट बनाया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि एक दिसंबर, 2024 से अस्तित्व में आया प्रदेश का 76वां जिला 31 मार्च 2025 तक अस्तित्व में रहेगा। इस जिले के लिए एक जिलाधिकारी, तीन अपर जिलाधिकारी, 28 उप जिलाधिकारी, एक तहसीलदार और 24 नायब तहसीलदार नियुक्ति किए गए थे। सुरक्षा के लिए इस पूरे जिले में 56 थाने, 155 पुलिस चौकियां, एक साइबर सेल थाना, एक महिला थाना और तीन जल पुलिस थाने स्थापित किए गए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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