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चार साल में ही धंस गया सोहना एक्सप्रेसवे, पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन

सुभाष चौक से बादशाहपुर के पार तक करीब 11 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बना हुआ है, जिसकी शुरुआत एसडी आदर्श स्कूल के पास से होती है। इसी शुरुआती हिस्से में जीएमडीए की मास्टर सीवर लाइन टूटने के कारण बुधवार को सड़क धंस गई।

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सोहना एक्सप्रेसवे धंसा

गुरुग्राम के व्यस्त रास्तों में गुरुग्राम-सोहना हाईवे पर एक बार फिर सड़क धंसने की घटना सामने आई है। यह मामला एसडी आदर्श स्कूल के पास का है, जहां पुरानी मास्टर सीवर लाइन के चलते एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया। घटना के बाद यातायात पुलिस, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और एनएचएआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के मुताबिक, सुभाष चौक से बादशाहपुर के पार तक करीब 11 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बना हुआ है, जिसकी शुरुआत एसडी आदर्श स्कूल के पास से होती है। इसी शुरुआती हिस्से में जीएमडीए की मास्टर सीवर लाइन टूटने के कारण बुधवार को सड़क धंस गई।

बताया जा रहा है कि यह सीवर लाइन करीब 30-35 साल पुरानी है और हाईवे निर्माण के दौरान इसे शिफ्ट नहीं किया जा सका था। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बार-बार सड़क धंसने की समस्या सामने आती रहती है। एनएचएआई के अनुसार, करीब 200 मीटर लंबी यह सीवर लाइन एलिवेटेड रोड के नीचे आती है, जिसे शिफ्ट करने के लिए पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं है।

इस इलाके में सर्विस रोड के पास स्कूल होने के कारण वाहनों का दबाव काफी अधिक रहता है, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। फिलहाल, सीवर लाइन की मरम्मत सीआईपीपी (CIPP) तकनीक से करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, इससे पहले भी कई बार इस लाइन की मरम्मत की जा चुकी है, लेकिन समस्या बार-बार दोहराई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, धंसी हुई सड़क के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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