पटना

'टाइगर अभी जिंदा है', इधर लालू यादव से ईडी ने की पूछताछ; उधर समर्थन में लगाए गए पोस्टर

Bihar Politics: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी बीच पटना में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। ईडी की पूछताछ के बाद लालू यादव के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। इस पोस्टर में लिखा है कि 'टाइगर अभी जिंदा है।' इसके अलावा पोस्टर में ये भी लिखा है कि न झुका हूं, न झुकूंगा...।

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पटना में लालू यादव के समर्थन में लगे पोस्टर।

Patna: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू यादव के समर्थन में उनके पटना स्थित आवास के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं। ये पोस्टर ऐसे वक्त पर लगाए गए हैं, जब प्रवर्तन निदेशालय ने कथित ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में उनसे पूछताछ की।

'न झुका हूं, न झुकूंगा, टाइगर अभी जिंदा है'

पोस्टरों पर लिखा था, 'न झुका हूं, न झुकूंगा, टाइगर अभी जिंदा है।' यह उस वक्त हुआ, जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बुधवार को ज़मीन के बदले नौकरी घोटाले के सिलसिले में ईडी के सामने पेश हुए। लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर ज़मीन के बदले रेलवे में नौकरी हासिल करने के लिए अपने प्रभाव का दुरुपयोग करने का आरोप है। मामले में ईडी की जांच जारी है।

लालू के बेटे तेजस्वी ने भाजपा पर कसा तंज

बीते मंगलवार को लालू प्रसाद की पत्नी और राजद नेता राबड़ी देवी और उनके बेटे तेज प्रताप यादव मामले में पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष पेश हुए। इस बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ 'राजनीतिक प्रतिशोध' के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं का 'दुरुपयोग' करने का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा कि इससे उन्हें मजबूती मिलेगी और वे बिहार में सत्ता में आ सकेंगे।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'राजनीतिक प्रतिशोध के कारण हमारे खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इससे हम पर कोई असर नहीं पड़ता। वे चिंतित और भयभीत हैं। वे जितना संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करेंगे, हम उतने ही मजबूत होंगे। हम उसी ताकत से बिहार में सरकार बनाएंगे। भाजपा और आईटी सेल की सभी टीमें अब सिर्फ बिहार में काम करेंगी।'

गिरिराज सिंह ने लालू यादव को लपेटा

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिराज सिंह ने राजद सुप्रीमो लालू यादव पर हमला करते हुए कहा कि बिहार को 'भ्रष्ट परिवार' से कोई मुख्यमंत्री नहीं चाहिए। गिरिराज सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार नीतीश कुमार को अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहता है, जिसका मतलब है कि नीतीश कुमार अधिक उपयुक्त और भरोसेमंद नेता हैं।

नीतीश कुमार वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री हैं, भाजपा के साथ गठबंधन में राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं। गिरिराज सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'बिहार को भ्रष्ट परिवार से कोई मुख्यमंत्री नहीं चाहिए। बिहार को नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में चाहिए।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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