पटना

DSP की फटकार से दुकानदार की मौत, भागलपुर में आगजनी-बवाल; माहौल तनावपूर्ण

बिहार के भागलपुर में फुटकर दुकानदार की मौत के बाद भड़का आक्रोश, आगजनी और सड़क जाम पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन और आगजनी हुई। इस घटना के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया। सिटी डीएसपी अजय चौधरी और एसडीएम धनंजय कुमार मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की।

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भागलपुर में आगजनी

भागलपुर: घंटाघर चौक पर शनिवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब फुटकर दुकानदारों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और आगजनी की। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। यातायात डीएसपी अपने दल-बल के साथ घंटाघर चौक पहुंचे थे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहे थे। इस दौरान सभी फुटकर दुकानदार अपने-अपने सामान समेट रहे थे, तभी फल विक्रेता महेंद्र साह को यातायात डीएसपी ने कथित रूप से ऊंची आवाज में डांटा और उन पर हाथ भी उठा दिया।

दुकानदार की सदमें में मौत

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी सदमे में महेंद्र साह को हार्ट अटैक आ गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, फुटकर दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और आगजनी कर सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया।

इस घटना के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया। सिटी डीएसपी अजय चौधरी और एसडीएम धनंजय कुमार मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की। सिटी डीएसपी अजय चौधरी ने कहा, "घटना की जांच की जा रही है। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी। एसडीएम धनंजय कुमार ने कहा, "हम दुकानदारों से अपील करते हैं कि वे शांति बनाए रखें। महेंद्र साह की मौत कैसे हुई, इसकी जांच कराई जाएगी। किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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