केंद्र की मोदी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान देश में जाति जनगणना करना का बड़ा फैसला लिया है। जानकारी के अनुसार, अगली जनगणना के साथ ही जाति जनगणना भी की जाएगी। बताया जा रहा है कि आगामी जनगणना में जाति जनगणना को पारदर्शी तरीके से शामिल किया जाएगा। जाति जनगणना के फैसले पर एक-एक करके विपक्ष नेताओं के बयान समाने आ रहे हैं। इस बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का बयान भी सामने आया है। उन्होंने बताया कि यह उनकी 30 साल पुरानी मांग थी।
तेजस्वी यादव ने जाति जनगणना के केंद्रीय सरकार के फैसले पर कहा "यह हमारी 30 साल पुरानी मांग थी। यह हमारी, समाजवादियों और लालू यादव की जीत है। इससे पहले बिहार के सभी दलों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन उन्होंने हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया था। कई मंत्रियों ने इससे इनकार किया, लेकिन यह हमारी ताकत है कि उन्हें हमारे एजेंडे पर काम करना है।"
तेजस्वी यादव ने कहा कि "जब हमने बिहार में जाति सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आरक्षण को बढ़ाकर 65% कर दिया था, तब भी हमने केंद्र सरकार से मांग की थी कि इस प्रावधान को अनुसूची 9 में शामिल किया जाए, लेकिन अब तक सरकार ने ऐसा नहीं किया है। जाति जनगणना परिसीमन से पहले की जानी चाहिए और जिस तरह से दलितों, एससी, एसटी और आदिवासियों के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में आरक्षित सीटें हैं, उसी तरह ओबीसी और अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षित सीटें होनी चाहिए।"
