जिस बुलेट ट्रेन की चर्चा दशकों से देश में हो रही है, वो जल्द ही बिहार में भी दौड़ने वाली है। रेलवे ने इसके लिए राज्य में काम शुरू कर दिया है। बिहार के पांच जिलों में 260 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक तैयार करने के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। यह प्रोजेक्ट वाराणसी-पटना-हावड़ा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। जिसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर होने वाली है। बहुत जल्द नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) इस परियोजना के लिए एजेंसी का चयन करेगी।
इन जिलों में बनेगा ट्रैक
बिहार में रेलवे ने बुलेट ट्रेन चलाने को लेकर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए पांच जिलों में 260 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा। पटना, बक्सर, आरा, जहानाबाद और गया वो पांच जिले हैं जहां से बुलेट ट्रेन को गुजारने की तैयारी चल रही है। जिसकी DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाने का निर्देश जारी कर दिया गया है।
दो चरणों में पूरा होगा काम
वाराणसी-पटना-हावड़ा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में वाराणसी, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, आरा, बक्सर, पटना और गया से हावड़ा तक एलिवेटेड ट्रैक तैयार किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में दिल्ली से वाराणसी तक का निर्माण कार्य होगा।
पटना के 58 गांव हुए चिह्नित
पूरे कॉरिडोर की लंबाई 799.293 किलोमीटर होने वाली है, जिसका 260 किलोमीटर हिस्सा बिहार से और लगभग 60.9 किलोमीटर लंबा ट्रैक पटना से गुजरेगा। शहर में एलिवेटेड ट्रैक के लिए 135.06 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी। जिसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए पटना के 58 गांवों को चिह्नित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के भूमि मालिकों को सर्किल रेट से चार गुना और शहरी क्षेत्र के भूमि-मालिकों को सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा दिया जाएगा।
बुलेट ट्रेन की खासियत
बुलेट ट्रेन को तो वैसे अपनी तेज गति से चलने के लिए जाना जाता है। माना जा रहा है कि इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद वाराणसी से हावड़ा के सफर में साढ़े तीन से चार घंटे का समय लगेगा। बुलेट ट्रेन की गति 350 किमी प्रति घंटे की होगी। सुविधाओं की बात करें तो ट्रेन में ऑटोमेटिक दरवाजों से लेकर आरामदायक बैठने की सीट तक कई सुविधाएं मिलेंगी। अत्याधुनिक फीचर्स से लैस इस ट्रेन के सारे डिब्बों में सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त मात्रा में सीसीटीवी कैमरे भी मौजूद होंगे।
