Muzaffarpur Shelter Home News: वैश्विक स्तर पर बिहार की छवि धूमिल करने वाला मुजफ्फरपुर शेल्टर होम आज भी लोगों को याद है। इस कांड की पीड़ित लड़कियां अब अपनी जिंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकीं हैं। कभी मारपीट और भुखमरी की शिकार यह लड़कियां आज देश के बड़े-बड़े होटलों में काम कर रहीं हैं। इनकी सैलरी सालाना चार लाख रुपए से लेकर सात लाख रुपए तक है। समाज कल्याण विभाग ने मुजफ्फरपुर के साथ बिहार के दूसरे शेल्टर होम से 47 लड़कियों को होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराया था। इनमें से 32 लड़कियों का पटना और बेंगलुरु के थ्री और फाइव स्टार होटल में प्लेसमेंट में सहयोग किया था।
विभाग द्वारा होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग के दौरान 22 लड़के और लड़कियों को प्लेसमेंट के लिए एक से तीन साल का इंतजार करना पड़ा। ट्रेनिंग के बाद भी 18 साल से कम उम्र होने के कारण 15 लड़कियां और 7 लड़कों का प्लेसमेंट हुआ है। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम से मुक्त हुई एक लड़की का कहना है कि चार साल से अधिक समय बीत गया है। अब भी उस शोषण की तस्वीर सामने आ जाती है। अब अपने पैरों पर खड़ी हूं और दूसरों की भी मदद कर रही हूं।
पहले मरना चाहती थी, अब जीना चाहती हूं
होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर नौकरी कर रही एक लड़की का कहना है कि पहले आत्महत्या करना चाहती थी। अब पूरी जिंदगी उत्साह के साथ जीना चाहती हूं। लक्ष्य पाने के लिए पुरानी परेशानी से ही खुद को मजबूत की हूं। समाज कल्याण विभाग से भी काफी मदद मिली है। एक लड़के ने बताया की पहले तो खुद नहीं पता था की कल क्या होगा। कोई लक्ष्य ही नहीं था। अब नौकरी करने के साथ अपने जैसे लोगों की मदद कर रहा हूं।
2020-2023 तक तीन बैच की ट्रेनिंग
समाज कल्याण विभाग द्वारा 2020 से 2023 तक तीन बैच संचालित किया गया है। इन तीन बैच में 67 अभ्यर्थियों को होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कोर्स कराया गया है। सभी शेल्टर होम और अनाथालय में रहने वाले हैं। इनमें से चार लड़कियां और तीन लड़कों को पटना स्थित होटल में प्लेसमेंट हो चुका है। विभाग का कहना है कि इन बच्चे-बच्चियों को प्रशिक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। आगे भी यह प्रशिक्षण जारी रहेगा।
