पटना

'हमें नौकरी चाहिए, लाठीचार्ज नहीं'; कांग्रेस के कन्हैया कुमार ने बिहार सरकार को जमकर घेरा

Kanhaiya Kumar slams Bihar Government: बिहार में इन दिनों कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा के दौरान कन्हैया कुमार ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को कोसते हुए कहा कि हमें नौकरी चाहिए, लाठीचार्ज नहीं। इस दौरान कन्हैया कुमार और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

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कन्हैया कुमार ने बिहार सरकार पर कसा तंज।

Photo : ANI

Bihar Politics: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को पटना में 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'हमें नौकरी चाहिए, लाठीचार्ज नहीं।'

'हमें नौकरी चाहिए, लाठीचार्ज नहीं'

कन्हैया कुमार ने कहा, 'हम सरकार से नौकरी की मांग कर रहे हैं और उनसे पलायन रोकने का आग्रह कर रहे हैं। चूंकि हमारी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, इसलिए जब तक सरकार हमारी बात नहीं सुनती, हम लोगों की आवाज सुनते रहेंगे और सरकार को अपनी बात सुनाते रहेंगे। यह प्रक्रिया जारी रहेगी। हमें नौकरी चाहिए, लाठीचार्ज नहीं।'

पटना में 'पलायन रोको-नौकरी दो यात्रा' के दौरान शुक्रवार को कन्हैया कुमार और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछारें

पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछारें कीं और उन्हें हिरासत में लिया, जिन्होंने 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया। एक पुलिस अधिकारी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि भीड़ के आक्रामक होने पर लगभग 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने कहा, 'वे काफी आक्रामक थे और बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। हमने नेताओं को हिरासत में लिया और लगभग 20 लोगों को हिरासत में लिया गया, हालांकि सटीक संख्या अनिश्चित है। उन सभी को कोतवाली पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा है। हमने उन्हें शांति बनाए रखने की चेतावनी दी थी, लेकिन वे अत्यधिक आक्रामक थे, जिसके कारण हमें हिरासत में लेने से पहले पानी की बौछारों का उपयोग करना पड़ा। हिरासत में लिए गए लोगों में कन्हैया कुमार भी शामिल हैं।'

'बिहार भर के युवा अपनी चिंताओं को व्यक्त कर रहे'

कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की और कहा कि सरकार का रुख स्पष्ट है: वे रोजगार या पलायन के बारे में सवालों का जवाब देने से इनकार करते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए खान ने कहा, 'सरकार की स्थिति स्पष्ट है: वे रोजगार या प्रवास के बारे में सवालों का जवाब नहीं देना चाहते हैं। वे अपनी नीतियों पर चर्चा करने से बचना पसंद करते हैं जो कठिनाइयां पैदा करती हैं। बिहार भर के युवा अपनी चिंताओं को व्यक्त कर रहे हैं। इन सवालों के जवाब में, मुख्यमंत्री को कहना चाहिए था, 'ठीक है, चलो आपके प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक बैठक की व्यवस्था करते हैं, ताकि आप वहां अपने सवाल रख सकें।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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