बात साल 2017 की है। ऑनलाइन गेम्स का सुरूर बच्चों के सिर चढ़कर बोलने लगा था। इसी दौरान ब्लू व्हेल चैलेंज नाम का एक ऑनलाइन खूनी गेम रातोंरात चर्चा का विषय बन गया। इस गेम के चक्कर में कई बच्चों ने आत्महत्या कर ली। कई ने अपने ही हाथ की नसें काट ली तो कुछ दूसरों की हत्या करने लगे। यह गेम था ही कुछ ऐसा। इसमें गेम खेलने वाले बच्चों को हर एक स्टेज पर अलग-अलग टास्क दिए जाते थे। जिनमें फांसी लगाने, हाथ की नस काटने, किसी को चाकू मारने जैसे टास्क दिए जाते थे। अचानक देशभर से ब्लू व्हेल चैलेंज गेम की वजह से ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई। आखिरकार सरकार ने इस पागलपन पर रोक लगाई और ब्लू व्हेल चैलेंज गेम को पूरी तरह से बंद कर दिया। लेकिन ऐसा ही एक मामला बिहार के भागलपुर से सामने आया है, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों को ऑनलाइन गेम ने घर से भागने का टास्क दिया।
भागलपुर के चौथी कक्षा के दो छात्र, चंचल राज और आशीष, ऑनलाइन गेम की लत में इस कदर डूबे कि 28 जून 2025 को वे अचानक घर से गायब हो गए। परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस तुरंत हरकत में आई। जांच के कुछ ही घंटों बाद पता चला कि दोनों बच्चे घर से करीब 100 किमी दूर पश्चिम बंगाल के फरक्का पहुंच चुके हैं।
पूछताछ में बच्चों ने बताया कि ऑनलाइन गेम में उन्हें एक टास्क दिया गया था, जिसमें उन्हें घर छोड़कर भागना था। वे ऑनलाइन गेम के इस टास्क को पूरा करने के लिए भागलपुर से निकल पड़े। SDPO डॉ. अर्जुन कुमार गुप्ता ने बताया कि गेम में उन्हें भागलपुर के ही एक स्थान पर पहुंचने का निर्देश मिला था, लेकिन वह गलती से मालदा-फरक्का ट्रेन में चढ़ गए।
पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज करके उनकी तलाश के लिए सोशल मीडिया, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर फोटो शेयर कर दी। देर रात करीब 1:30 बजे RPF ने फरक्का स्टेशन पर बच्चों की मौजूदगी की सूचना दी। बच्चों ने बताया कि वह पीरपैंती से ऑटो लेकर स्टेशन पहुंचे और रास्ते में एक नई ड्रेस भी खरीदी।
इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। ऑनलाइन गेम की लत बच्चों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है, यह घटना उस बात का जीता-जागता उदाहरण है। वो तो अच्छा हुआ कि बच्चे सही समय पर सही-सलामत मिल गए, अन्यथा उनके साथ कोई दुर्घटना भी हो सकती थी। वह मानव तस्करी करने वाले गिरोह के हाथ आ सकते थे, जिससे उनकी जिंदगी नरक जैसी हो सकती थी या वह जान भी गंवा सकते थे।
