पटना

Bharat Bandh: पटना में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, भारत बंद का बिहार में मिलाजुला असर

Bharat Band: एससी/एसटी के आरक्षण में क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ में देशभर में भारत बंद बुलाया गया। उत्तर भारत में इसका अच्छा खासा असर देखा जा रहा है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज कर दिया।

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पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर किया लाठीचार्ज।

Police lathi-charge in Patna: बिहार में भारत बंद का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है, लेकिन राजधानी पटना से एक वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां भाजी। पटना में लाठीचार्ज के अलावा जहानाबाद में पांच प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में बिहार में विभिन्न दलित और आदिवासी संगठनों द्वारा बुधवार को आहूत भारत बंद का कई हिस्सों में असर देखने को मिला।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर किया लाठीचार्ज

बिहार की राजधानी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जहां आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ एक दिवसीय भारत बंद के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने पटना में लाठीचार्ज किया। बता दें, बिहार में केंद्रीय कॉन्स्टेबल चयन बोर्ड (सीएसबीसी) कई जिलों में पुलिस की विभिन्न इकाइयों में सिपाही पद के लिए बुधवार को भर्ती परीक्षा भी आयोजित कर रहा है।

सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

जहानाबाद जिले में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-83 (एनएच-83) पर यातायात अवरुद्ध किया और इस दौरान उनकी सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हुई। जहानाबाद नगर थाना के अवर निरीक्षक हुलास बैठा ने पत्रकारों को बताया, "ऊंटा मोड़ के पास एनएच-83 पर यातायात अवरुद्ध करने की कोशिश कर रहे पांच प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।" उन्होंने बताया कि बाद में सभी प्रदर्शनकारियों को एनएच-83 से हटाकर यातायात बहाल किया गया, हालांकि इस दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प भी हुई।

पुलिस के मुताबिक, मधेपुरा और मुजफ्फरपुर में भी प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर यातायात को अवरुद्ध करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें तुरंत प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटर इंक्लूसिव अलायंस) में शामिल कई अन्य दलों ने विभिन्न दलित एवं आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद का समर्थन किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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