Bihar Hooch Tragedy: बिहार में जहरीली शराब का कहर जारी है। बिहार में जहरीली शराब से कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई है। इस मामले को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है।
शराब बैन फिर भी मर रहे लोग
बिहार में शराब बैन है, यहां शराब बेचना, खरीदना और पीना तीनों जुर्म है। इसके बाद भी कहा जाता है कि यहां शराब की धड़ल्ले से बिक्री होती है। कई जगहों में स्थानीय लेवल पर बनाई गई शराब बेची जाती है, जिससे कई बार लोगों की जान जा चुकी है।
5 थानेदार सस्पेंड
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से जान गंवाने वालों की संख्या सोमवार को बढकर 26 हो गई। इस मामले में पांच थानाध्यक्षों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस ने क्या कहा
पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने सोमवार को पीटीआई से बात करते हुए कहा- "पिछले दस घंटों में चार और लोगों की मौत होने के बाद, मरने वालों की कुल संख्या अब 26 हो गई है। घटना के बाद संबंधित थानों के पांच थानाध्यक्षों को भी कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने को लेकर निलंबित कर दिया गया है।"
चौकीदार भी निलंबित
उन्होंने बताया कि तुरकौलिया, हरसिद्धि, सुगौली, रघुनाथपुर और पहाड़पुर के थानाध्यक्षों को निलंबित किया गया है। जिला पुलिस ने इस मामले को लेकर रविवार को दो पुलिस अधिकारियों एवं नौ चौकीदारों को निलंबित कर दिया था। जिला पुलिस ने अब तक पांच मामले दर्ज किए हैं और जांच कर रही है।
मुआवजे का ऐलान
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि प्रदेश में एक अप्रैल 2016 यानि शराबबंदी लागू होने के बाद से जिन लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुयी है, उनके आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार-चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिये जायेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इसके लिये कुछ शर्त भी रखी है।उन्होंने कहा कि अब जिस परिवार का कोई सदस्य इससे मरा है, उस परिवार के लोग साफ तौर पर यह बता दें कि ये उनके परिवार के सदस्य हैं, और उन्होंने कहां से शराब खरीदी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सब लिखित रूप में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी को भेजना होगा। अगर पीड़ित परिवार यह सब जानकारी लिखित रूप में जिलाधिकारी के यहां भेजेगा तो हमने यह तय कर दिया है कि परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से चार लाख रुपये की मदद दी जाएगी।
