पटना

बिहार सरकार का बड़ा राहत पैकेज, मोंथा से हुए नुकसान की होगी भरपाई; 12 जिलों के किसानों के मिलेगा मुआवजा

बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने 12 जिलों में जिन किसानों की फसल भूमि अक्टूबर में भारी बारिश, बाढ़ या मोन्था चक्रवात से क्षतिग्रस्त हुई थी, उन्हें उनकी भूमि के प्रकार और गुणवत्ता के आधार पर तीन अलग-अलग दरों पर कृषि इनपुट सब्सिडी देने का ऐलान किया है।

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बिहार में किसानों को फसल के नुकसान का मिलेगा मुआवजा

पटना : कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को बताया कि राज्य के 12 जिलों में जिन किसानों की फसलें अक्टूबर में भारी बारिश, बाढ़ या मोखा चक्रवात की वजह से खराब हुई हैं, उन किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी किसानों की जमीन के प्रकार और गुणवत्ता के आधार पर तीन अलग-अलग दरों पर दी जाएगी।

मंत्री ने कहा कि नई सरकार बनते ही किसानों को राहत देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, 12 जिलों के 39 प्रखंडों की 397 पंचायतों में फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। फसल क्षति का सर्वे और आकलन पूरा कर लिया गया है, और अब सरकार पात्र किसानों को जल्द ही मुआवजा राशि देने जा रही है।

इस आधार पर यह राशि दी जाएगी

  • असिंचित (बारिश आधारित) भूमि पर: ₹8,500 प्रति हेक्टेयर
  • सिंचित भूमि पर: ₹17,000 प्रति हेक्टेयर
  • बहु-फसलीय भूमि (जिसमें गन्ना भी शामिल है): ₹22,500 प्रति हेक्टेयर
  • यह राशि अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक के लिए मिलेगी।

कितनी मिलेगी सब्सिडी

सरकार छोटे और सीमांत किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी देगी। ऐसे किसानों के लिए न्यूनतम देय दर असिंचित भूमि के लिए 1,000 रुपये, सिंचित भूमि के लिए 2,000 रुपये और बहु-फसलीय भूमि के लिए 2,500 रुपये है। 12 प्रभावित जिलों में गया, भोजपुर, मधेपुरा, बेगुसराय, पूर्वी चंपारण, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, कैमूर, मधुबनी, शिवहर और सुपौल शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को मुआवजा लाभ प्रदान करना सरकार की प्रतिबद्धता है।

2 दिसंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन

मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे 2 दिसंबर तक कृषि विभाग की वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर लें, ताकि सब्सिडी का लाभ समय पर मिल सके।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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